PM मोदी के काशी में विश्व आदिवासी दिवस के दिन उठाई शोषित और वंचितों की आवाज

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वाराणसी (ब्यूरो): भारत के दलित संगठनों द्वारा भारत बंद की घोषणा के अवसर पर बनारस के दलित संगठन और प्रोग्रेसिव समाज के लोगो की ओर से गुरुवार को राष्ट्रपति महोदय को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन दिया गया। इसके पहले विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रिदम के नेतृत्व मे आशा ट्रस्ट एयर फार केयर विजन दलित अधिकार मंच पूर्वांचल किसान मोर्चा ठेला पटरी व्यावसायिक संघ सद्भावना समिति लोक समिति आरक्षण बचाओ समिति आओ अच्छा गांव बनाये पीस एण्ड हार्मल इंसाफ मंच आदि सामाजिक संगठनों के सैकङो कार्यकर्ता सुबह दस बजे भीमराव अम्बेडकर पार्क कचहरी जुटे और सभा किया सभा मे वक्ताओं ने कहाकि देश मे लगातार विगत कुछ महीनों से दलित राजनीति को ले कर भरम का माहौल चुनावो के पूर्व बनाया जा रहा है।

जंहा कुछ लोग इस भारत बंद के आह्वाहन को आरएसएस बीजेपी प्रायोजित होने की आशंका जाहिर कर रहे है और कुछ का कहना है कि  बीजेपी ने लोकसभा में एससी एसटी कानून को पूर्व की भांति पास करवा दिया है इस लिए अब भारत बंद का कोई औचित्य नही है। इस विषय मे डा. अनूप श्रमिक ने सभी को बताया की वर्तमान सरकार का लोक सभा मे एससी एसटी बिल पास कराने का कृत्य एक ढोंग और दिखावा है ।

 हम सब दलित संगठनों के लोग उनको यह बताना चाहेंगे 

सिर्फ एससी एस टी बिल पास करवा देने से ही काम नही चलेगा। पिछले चार सालों में दलितों के प्रति हिंसा में 6% वृद्धि हुई है महिलाओ के साथ हिंसा बेतहाशा बढ़ी है हर तरह की महिला हिंसा में 50% तक कि वृद्धि हुई है।अल्पसंख्यकों पर हिंसा की तो हद हो गई है ।मॉबलिंचिंग की सैकड़ो घटनाये हो चुकी जिसमे तीन दर्जन से अधिक जाने जा चुकी है और इस तरह की हिंसा करने वालो के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हो रही उल्टे उनको संरक्षण प्रोत्साहन मिल रहा है। किसान आत्महत्या दर बढ़ी है जिसमे छोटे किसान की संख्या बढ़ी है।मजदूरों की सुरक्षा खत्म कर दी गई नए बदलावों में।

विकास के तमाम झूठे दावों के प्रचार में करोड़ो फूंकने और मीडिया को सत्ता का गुलाम बना लेने के बाद यह सच किसी से छुप नही रहा कि इस सरकार की नीतियों फैसलों के कारण पहले से भी ज्यादा स्वास्थ,शिक्षा,रोजगार, में दलित आदिवासी समाज हाशीये पर आ खड़ा हुआ है, 2करोड़ नौकरियां देने का वादा कर सरकार अब कह रही है कि जब सरकारी नौकरियां ही नही है तो आरक्षण लेके क्या करोगे? शिक्षा का निजीकरण कर के गरीब दलित आदिवासी पिछडो को वंचित करने का खेल खुल कर हो रहा है।यूजीसी जैसे संस्थानों /फेलोशिप सरकारी स्कूलों को सरकार बंद करटी जा रही है।नक्सली बता कर दलितों आदिवासियों की हत्या और शोषण लगातार किया जा रहा है। स्वछता अभियान की बात सरकार करती है लेकिन आज भी भारत का सफाई कर्मी हाथों से  मैला ढोने सीवर में उतरने को मजबूर है। दुख की बात यह है कि दलितों के वोट ले कर उनके बीजेपी के समर्थन से ससंद विधानसभा में चुने गए सैकड़ो दलित सांसदों और हज़ारो विधायकों में 99% ये सबकुछ देखते हुए बेशर्मो की तरह अपनी आंखें बंद कर रखे हैं।

सभा के पश्चात जुलूस निकालकर नारेबाजी करते हुए 9 अगस्त के दिन शांति पूर्वक दलित समाज की तरफ से दस सूत्रीय मांगों को देश के प्रथम नागरिक दलित राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से भेजा गया। साथ ही कहाकि अपने देश के बीजेपी और सरकार में शामिल अन्य सभी दलों के निक्कम्मे अवसरवादी दलित सांसदों विधायको और सरकार को आगाह करते हैं कि अगले 100 दिनों भीतर निम्नलिखित मांगो को पूरा करे।अन्यथा 2019 में भारत की दलित आदिवासी जनता आपकी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कमर कस के आंदोलन में उतरेगी।

मांगे इस प्रकार हैं

1. एससी/एसटी पीओए एक्ट1989 को 20/3/2018 के पूर्व की भांति संशोधित कर संविधान के नौंवी अनुसूची में डाला जाये।1989 की धारा14 के अंतर्गत हर जिले में विशिष्ट न्यायालय की स्थापना हो, साथ ही जिले में बनाई गई कमेटियों को शक्ति प्रदान किया जाए।

2. 2अप्रैल के आंदोलन में गिरफ्तार किए गए आंदोलनकारीसाथियो और यूपी के चंद्रशेखर रावण और उनके साथियो पर से रासुका हटाते हुए तत्काल रिहा किया जाए ।नक्सली बता कर दलित आदिवासियों की होरही हत्या और उनपर उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए।

3. आरक्षण व पदोन्नति में आरक्षण,प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू हो शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था के साथ बहाली हो। देश मे एससी एसटी ओबीसी के रिक्त सभी बैकलॉग पदों को तत्काल भरा जाये। साथी साथ ठेका प्रथा समाप्त किया जाए।

4. दलितों आदिवासियों के आर्थिक व सामाजिक उत्थान के लिए बने स्पेशन कंपोनेंट प्लान फ़ॉर शेड्यूल कास्ट एंड सब ट्राइबल प्लान पर भी सरकार अध्यादेश ला के एक कानून बनाये की एसपीसी एसटीपी केंलिये आवंटित बजट सिर्फ उसी मद में ही खर्च हो और जितनी राशि आवंटन हो वो प्रतिवर्ष जनता के विकास में पूर्ण तया खर्च हो यानी उस बजट का पैसा  वापस ना हो।इस उद्देश्य से राज्य और जिले स्तर पर मानिटरिंग कमेटियां बनाई जाए।

5. दलितों आदिवासियों एवम अन्य भूमिहीन गरीबो को तत्काल कम से कम 2 एकड़ खेती योग्य सिंचित जमीनो का आवंटन किया जाये।साथ ही साथ अधिया पर काम कर रहे गरीब किसानों /खेत मजदूरों को मुआवजे का प्रावधान किया जाए

6. मैन्युअल स्क्वेनजिंग एक्ट 2013 का कड़ाई से पालन किया जाए ताकि मैला ढोने /सीवर सफाई केअमानवीय कार्य पर रोक लग सके। साथ ही साथ देश के सफाईकर्मियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन और उनके रहने के लिए सरकारी आवास मुहैय्या करवाया जाए।

7. देश मे कॉमन स्कूल सिस्टम लागू करने के साथ पाठ्यक्रम में जेंडर व सामाजिक न्याय  की दृष्टि केअनुरूप बदलाव के साथ लागू किया जाए

8. देश मे स्वास्थ सुविधाओ का भी सरकारी करण करते हुए हर जिले के पीएचसी सीएचसी पर पर्याप्त डॉक्टरों के अलावा निशुल्क लैब व दवाइयों की व्यवस्था करवाई जाये

9. पढेगी बेटी बढ़ेगी बेटी से ही काम नही चलने वाला है हर क्षेत्र में महिलाओ के लिए 40% आरक्षण,आरक्षण के साथ तत्काल दिया जाए

10. न्याय व्यवस्था में उच्च न्यायालय  और सर्वोच्व न्यायालय से कोलेजियम सिस्टम हटा कर भारतीय सिविल सेवा की तरह भारतीय न्यायिक सेवा आयोग का गठन कर उच्च न्यायलय और सर्वोच्व न्यायालय के जजो की नियुक्ति के लिए परीक्षा का आयोजन आरक्षण के नियमानुसार करवाया जाये ताकि उच्च और सर्वोच्च न्यायालयो में एएससी,एसटी,ओबीसी के लोगो की भागीदारी सुनिश्चित होसके इस दौरान डा. अनूप श्रमिक वल्लभाचार्य इंदू रवि संजीव सिंह जागृति राही ममता प्रेम सोनकर डा. आरिफ राजकुमार गुप्ता नंदलाल मास्टर रंजू सिंह कामता डा. बबिता आदि लोग शामिल रहे।

रिपोर्ट- राज कुमार गुप्ता 

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