पीएमएवाई: मतलब चयनित पात्रों को कर्जदार बनाना

0
69


मुरलीछपरा/बलिया (ब्यूरो)- प्रधानमंत्री आवास योजना का चयन मतलब कि पात्रों को कर्जदार बनाना है, जिसका जीता-जागता उदाहरण मुरली छपरा ब्लाक के विभिन्न पंचायतों में सहजता से देखा जा सकता है। शासन स्तर से प्रधानमंत्री आवास के लिए मजदूरी व शौचालय की धनराशि मिलाकर लगभग डेढ़ लाख रुपये पात्रों को दिया जाता है किंतु सत्यता यह है कि पात्रों के यहां यह धनराशि पहुंचने में भी काफी बंदरबांट हो रहा है।

अगर पात्रों की बात करें तो चयन के समय से ही बिचौलियों द्वारा उनके ऊपर तरह-तरह के दबाव बनाए जाते हैं और पहली किश्त आते ही उनका बंदरबांट कर लिया जाता है, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया आरंभ होती है। अगर उसमें से पैसा नहीं दिया है तो दूसरी किश्त के लिए रिपोर्ट तक नहीं जाती है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित लाभार्थियों द्वारा समय से आवास का निर्माण नहीं कराया गया तो अधिकारी गांव-गांव जाकर पात्रों पर दबाव बनाने लगे कि आवास हर हाल में पूरा करें अन्यथा की स्थिति में मकदमा के साथ ही रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी किंतु जब पात्रों द्वारा धनराशि के बंदरबांट बताई गई तो अधिकारी वहां से खिसकना ही उचित समझे।

इसी क्रम में ग्राम पंचायत सोनबरसा के पूरवा चौबे की दलकी में प्रधानमंत्री आवास में चयनित लाभार्थियों की जांच में गए तो लगभग सभी लाभार्थियों का आवास अधूरा मिला। जब उन्होंने भिरूग राम से आवास पूरा न करने का कारण पूछा तो उन्होंने डंके के चोट पर कहा कि आवास के लिए हम से पहले किश्त में मिले धनराशि से 30 हजार रुपये तक का बीडीओ के नाम पर रिश्वत लिया गया है। ऐसी स्थिति में किस तरह से आवास पूरा किया जा सकता है, तो खंड विकास अधिकारी का कहना था कि तुम किसी को पैसा दो, कोई अधिकारी तुमसे कहा था। अगर आवास मिला है तो किसी रह से पूरा करना है और यह निर्देश देकर अधिकारीद्वय आगे बढ़ गए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here