पीएमओ से बहुत उम्मीदें थीं पर उसने ही सबसे ज्यादा निराश किया : संजीव चतुर्वेदी

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sanjeev chaturvedi

आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस ( AIIMS ) में चीफ विजिलेंस ऑफिसर के तौर पर काम करते हुए दो साल में 150 से भी अधिक भ्रष्टाचार के मुद्दों को उजागर करने वाले संजीव चतुर्वेदी को रेमन मैग्सेसे अवार्ड देने की घोषणा हुई है, यह अवार्ड उन्हें सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार उजागर कर उसका विरोध करने के लिए दिया जा रहा है |

संजीव ने कहा “मेरे काम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया इसकी मुझे बहुत प्रसन्नता है, लकिन मेरे प्रति हरियाणा और केंद्र सरकार का रवैया बड़ा ही परेशान करने वाला रहा है, मोदी जी के ना खाऊंगा ना खाने दूंगा के भाषण ने मुझे काफी बल दिया था और मुझे केंद्र सरकार से काफी उम्मीदें थीं लेकिन ज़मीन पर ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला |

विवाद तब शुरू हुआ जब पीएम ने अगस्त 2014 को फोन करके तत्कालीन हेल्थ मिनिस्टर हर्षवर्धन से रिपोर्ट मांगी। उन्हें ऐसी रिपोर्ट दी गई जो दस्तावेजों पर आधारित नहीं थी। मैंने पीएम को इस मामले में भ्रष्ट अफसरशाहों और नेताओं के गठजोड़ के सबूत दिए और निष्पक्ष जांच की मांग की, लेकिन फिर भी एक साल से मेरा ही उत्पीड़न हो रहा था। जब मुझे एम्स के सीवीओ पद से हटाना था, तब 24 घंटे में 20 अधिकारियों ने हस्ताक्षर कर दिए। लेकिन जब प्रमोशन और ट्रांसफर का मामला आया तो फाइलें दबा दी गईं। सबसे दुख की बात थी कि खुद हेल्थ मिनिस्टर ने बिना किसी आधार के प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि संजीव के खिलाफ कुछ शिकायतें हैं, जिनकी जांच चल रही है, जबकि यह बिल्कुल गलत है।

 

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