कवि एवं सहित्यकार पदमाकर के जन्मदिवस पर काव्य गोष्ठी

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मैनपुरी(ब्यूरो)- साहित्यकारों के सम्मान एवं स्मरण की श्रृखंला में प्रत्येक माह की 30 तारीख को होली पब्लिक स्कूल में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह 59 वाॅ माह का कार्यक्रम था। इस 59 वाॅ माह की काव्यगोष्ठी पर कवि एवं साहित्यकार पदमाकर के जन्म दिवस माह पर 30.06.17 दिन शुक्रवार सायःकाल काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि श्री पुष्पेन्द्र चतुर्वेदी जी थे। विशिष्ठ अतिथि विधा सागर शर्मा जी थे। अध्यक्षता ओम प्रकाश वर्मा कवि भोगॅाव नेे की। काव्यगोष्ठी का संचालन बदन सिंह मस्ताना भोगाॅव ने किया।

श्री कृष्ण मिश्र जी ने कवि एवं साहित्यकार पदमाकर जी के विषय में बताया इनका जन्म जून माह में सागर हुआ था इनका बाॅदा में पालन पोषण हुआ था| आप की रचनाऐ जग विनोद, पदमाभरण, गंगा लहरी, यमुना लहरी आदि है। आपने श्रंगार रस ओज में काव्य रचना की थी। पदमाकर जी के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।

काव्य गोष्ठी में प्रमुख कवियों ने भाग लिया। बदन सिंह मस्ताना ने कहा मैं तो पिया गुजर कर लूॅगीं, धोती फटी पुरानी में, रानी बनकर संग रहूॅगी, तेरी टूटी छानी मैं। धर्मेन्द्र सिह धरम ने कहाॅ अब नेंक खेतन में बरसियों भगवान, बूॅद बूॅद को तरसे विरवा कैसे जिये किसान। डा0 आनन्द प्रकाश शाक्य जी कहा मीठा-मीठा बोल रे मनवा मीठा-मीठा बोल, मन में मिश्रुरी घोल रे, मनवा मीठा-मीठा बोल। गिरीश यादव निराला ने कहा उन्हे सम्मान मिलता है जो जीवन को तपाते है उन्ही को मान मिलता है खुशी सबको लुटाते है। जय प्रकाश मिश्र कहा जो मै मुझे मेरा का शिकार हो गया, मानवतावाद उसके सामने बेकार हो गया। बिजेन्द्र सिंह सरल ने कहा मन राधा जी के लगन लगी, बिछड़े कान्हाॅ की अगन लगी। मुरली की तानें सुनन चली, उनकी बातों को गुनन चली। विधाराम केसरी ने कहा कि कैसा है विकास अपना विनाश लिए, आ रहा मनुज जाने कौन मुकाम लिए। श्री कृष्ण मिश्र ने कहा फूल तो फूल है चाहे जहाॅ खिले नियति है उसकी खुश रहना और खुश रहते हुए मिट जाना। ऋषभ वर्मा ने कहा कि हम गीत और गजल में श्रृंगार लिखते है, हमारे लिए तो पायल की छन-छन है जिन्दगी। दुर्गेश भदौरिया ने कहा कि कहानी कब बदल जाए कोई ये कह नही सकता, यहाँ पर सब परेशान है कोई खुश रह नही सकता। श्री चन्द्र सरगम ने कहा तुमने अपनापन छोड दिया, हमने भी रिस्ता तोड़ दिया। अनवन का कारण ज्ञात नही, तुमने पहले मुख मोड लिया। ओउम प्रकाश वर्मा मिट्टी का हर कण-कण बोले, धरती का हर तृण-तृण बोले। घोल रहा है क्यों जहर तू मुझमें, मेरा उर तो सोना उगले। विजय रक्षा भदौरिया उठ भारती के लाल तुझें माॅ पुकारती, लो आ गया वक्त अपना कर्ज माॅगती।

काव्यगोष्ठी में अभय शर्मा, एम0 एस0 कमठान, नीटू मिश्रा, शिवनन्दन कुशवाह, प्रवेश कुमार श्रीवास्तव, ज्ञानेन्द्र नाथ दीक्षित, डा0 अनुराग दुबे, श्रीकृष्ण मोर्य, ई0 एम0 अनम, सत्य सेवक मिश्र (भू0 पू0 प्राचार्य) प्रवीण कुमार सक्सैना आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। अतं में काव्यगोष्ठी की सफलता पर सयोजक विनोद माहेश्वरी ने सभी को धन्यवाद दिया।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा 

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