ब्रांडेड नामों से मिलते-जुलते नामों से पानी के रूप में बिक रहा ज़हर

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सफीपुर (उन्नाव)- सफीपुर क्षेत्र में ब्रान्डेड नामों से मिलते जुलते नाम के आर ओ की लगातार सेवा एक दिन मौत का कारण बनेगा।चिलचिलाती गर्मी में कुछ मिले या ना मिले पर शरीर को पानी ज़रूर मिलना चाहिए। सफीपुर तहसील क्षेत्र में फत्तेपुर चौरासी, उगू, सफीपुर नगर व ग्रामीण, परियर, तकिया सहित तमाम पूरे क्षेत्र में मिलते जुलते ब्रांडेड नामों के आर. ओ. लगाए जा रहे हैं।

अगर बात पानी के पाउच की करे तो क्षेत्र के तमाम जगहों चाहे पान की दुकान हो या फिर ठंडे पानी की दुकान हो इन लोगों के यहाँ पानी के पाउच तो मिलेंगे लेकिन मानक के विपरीत ऐसे में पानी पाउच माफिया कम दरों में अच्छा पानी कहकर पूरे क्षेत्र में जहर घोलने का काम कर रहे है। लोकल आर. ओ. की तादाद बढ़ती जा रही है यही एक दिन मौत का कारण बनेगा। अगर पानी आर.ओ का हो तो, क्या बात है परंतु क्या वास्तव में हम लोकल आर.ओ. के पानी को शुद्ध पानी मान सकते हैं जवाब आता है बिल्कुल नहीं। और यह जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की तरफ से दिया गया है।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि इसके लगातार सेवन से हृदय संबंधी विकार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, सर दर्द, पथरी आदि दुष्प्रभाव पाए गए हैं। यह कई शोधों के बाद पता चला है कि इसकी वजह से कैल्शियम और  मैग्नीशियम पानी से पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं जो कि शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

लोकल आर ओ के पानी के लगातार इस्तेमाल से शरीर मे विटामिन बी-12 की कमी भी होने लगती है।वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर 500 टीडीएस तक सहन करने की क्षमता रखता है परंतु लोकल आर ओ में 18 से 25 टीडीएस तक पानी की शुद्धता होती है जो कि नुकसानदायक है। इसके विकल्प में क्लोरीन को रखा जा सकता है जिसमें लागत भी कम होती है एवं पानी के आवश्यक तत्व भी सुरक्षित रहते हैं।जिससे मानव का शारीरिक विकास अवरूद्ध नहीं होता।भारत में आर ओ की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। और कई विदेशी कंपनियों ने यहां पर अपना बड़ा बाजार बना लिया है।जिसके चलते लोकल आरओ की भी बाढ़ आ चुकी है समय रहते अगर इस पर काबू नही पाया गया तो बहुत भयानक और खतरनाक बीमारीयों को आने में देर नहीं लगेगी। स्वास्थय के प्रति जागरूक रहना और जागरूक करना ज़रूरी हैं।याद रखें की लम्बे समय तक अगर आप किसी लोकल आर ओ का पानी, लगातार पीने से, शरीर कमजोर और बीमारियों का घर बन जाता है।

रिपोर्ट- राम जी गुप्ता

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