मुसाफिरखाना पुलिस ने उड़ाई मानवाधिकार की धज्जियाँ, पीड़ितों , महिलाओं और ग्रामीणों की जमकर पिटाई फिर लॉकप में डाला

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अमेठी (ब्यूरो) जनपद के थाना कोतवाली मुसाफिरखाना अंतर्गत गांव दादरा में दवंगो द्वारा निमंत्रण में आये लोगो की पिटाई की सूचना पाकर पहुंची 100 नंबर डायल पुलिस तथा एस0 ओ0 विनोद कुमार मिश्र ने पीडितो और ग्रामीणों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा । निर्दोषो को भी पीटकर ले गई थाने। मजे की बात यह है की आरोपियों को पुलिस छुआ तक नहीं बल्कि आरोपियों के घर पर बैठकर मित्रवत व्यवहार करते नजर आई मुसाफिरखाना पुलिस। पुलिस के इस कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में खास गुस्सा देखने को मिला लेकिन उनकी बेबशी सिर्फ उतनी है की यह योगी की मित्र पुलिस है किसी को मारपीट कर जेल में डाल सकती है ।

बताते चलें कि भले ही प्रदेश की योगी सरकार पुलिस को पीडितो को त्वरित न्याय दिलाने के लिए पुलिस को मित्र पुलिस की भूमिका में नजर आने का सपना देख रही हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ इससे अलग है। ताजा मामले में सूचना पर पहुंची पुलिस पीडितो को ही पीटकर पीटकर जीप में डालकर थाने ले गई। खुलेआम पुलिस ने महिलाओ की भी खूब पिटाई कर तांडव मचाया। सीधे शब्दों में कहा जय तो पुलिस मानवाधिकार का खुला उलघ्घन किया । इससे आमजनमानस में काफी किरकिरी हो रही है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो मामला इस तरह है। -पीड़ित शंकर पासी के यहाँ निमंत्रण का कार्यक्रम था। जिसमे भोजन का कार्यक्रम चल रहा था उसी बींच गांव के ही ढोंढे पासी अपने कई बेटो के साथ लाठी डंडा लेकर आये। भोजन कर रहे लोगो को अचानक मारना शुरू कर दिया। मारपीट में दर्जनों लोगो को चोटें आई है। पीड़ित 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस वाले सीधे आरोपी के घर गए । लोगो की माने तो घर के अंदर सेटिंग गेटिंग का खेल चला फिर घर के बाहर निकालकर पुलिस वालो ने किसी को फोन किया। कुछ ही देर में 100 नंबर की दूसरी गाड़ी भी आ गई। कुछ देर बाद प्रभारी निरीक्षक कोतवाली विनोद कुमार मिश्र भी पहुँच गए। तब तक आरोपी अपने घर में आराम से बैठे थे। जब थानाध्यक्ष आरोपियो के घर से बाहर निकले तो उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उनके निर्देश पर पुलिस और वे स्वयं ने डंडे और लाठियो से पीडितो को ही पीटना शुरू कर दिया | यही नहीं महिलाओ की भी पिटाई की गई। पुलिस की करनी देखकर ग्रमीण स्तब्ध रह गये।

देखते ही देखते पुलिस वालो ने ग्रामीणों को भी पीटना शुरू कर दिया लोग भाग कर अपने घरो में छिप गए। खास बात यह रही की पुलिस ने दबंगई करने वालो आरोपियों को छुआ तक भी नहीं पुलिस की इस कार्यशैली से ग्रामीणों में एक तरफ रोष ओ भय व्याप्त है तो दूसरी तरफ दबंगो का हौसला बुलंद है। पुलिस की इस तरह की कार्यवाही पर उंगली उठाना लाज़मी है। निर्दोष महिलाओ, पीड़ितों, ग्रामीणों को इस तरह पुलिस द्वारा सरेआम पिटाई करना निशित ही मानवाधिकार का खुला उलघ्घन है। गरीबो की बेबशी यही है की उनकी कौन सुनेगा। मामला कुछ भी हो पूरे प्रकरण से तो नहीं लगता है की पुलिस इसमें न्याय करने के मूड में है। अब देखना यह है की मामला बड़े अधिकारियों के संज्ञान में आने पर उन्हें न्याय मिलेगा या फिर संलिप्त पुलिस की ही बात मानेगें । फ़िलहाल वहाँ की नजाकत देखने से दिखाई देता है की अगर जाँच होगी तो पुलिस की तानाशाही जरूर सामने आएगी लेकिन कारवाही करेगा कौन।

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