आम जनता को कानून सिखाने वाली खाकी खुद क्यों नहीं करती नियमो का पालन

कालाकांकर/प्रतापगढ (ब्यूरो)- रक्षा बन्धन के पावन त्योहार पर इस बार भाई बहनो को त्योहार पर गिफ्ट या व्यंजनो पकवानो को लाने मे या रिश्तेदारी आने जाने मे बडी कठिनाईयो का सामना करना पड़ा | वजह ये रही कि जगह जगह पुलिस ने चेकिंग लगा कर त्योहार के मौके पर जारा सी कमी पर भी गाडी सीज करना या तो जुर्माना लेना आम बात हो गयी है |

कितने गरीब भाई जो रोजी रोटी के जुगाड में दो पैसा कमाने के लिये साल भर परदेश में रहते हैं ? साल भर के त्योहार में आते हैं और खरीददारी के लिये बाजार जाते हुये रास्ते या चौराहों पर पुलिस इनकी गाड़ी का चालान कर देती है अगर पैसा न दे तो सीज भी कर देती है । अब वो भाई पैदल ही आंखो में आंसू लेकर वापस घर जाकर त्योहार भूल जाता है पैसों की व्यवस्था करके गाड़ी छुड़वाने के लिये थाना और कचहरी के चक्कर लगाने लगता है |ना जाने ऐसे कितने लोगों का त्योहार यादगार बन जाता है |

कल कुन्डा के दरोगा ने त्योहार मनाने छुट्टी पर आये फौजी को भी बन्द कर दिया था,लेकिन बात अगर कानून की हो तो कानून जनता के हित में ही होते हैं न कि उनको परेशान करने के लिये कानून अगर जनता और फौजिये के लिये है तो कानून पुलिस के लिये भी होने चाहिये । जब दरोगा खुद ही नियमों का पालन करने में असमर्थ रहते हैं और नियम के विपरीत चलते हैं तो कार्यवाही उनके ऊपर भी होनी चाहिये | आईये हम आप को दिखाते है कि दूसरो का चालान करने वाली खाकी किस प्रकार से नियमो का पालन करती है |

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