दबंगो के सामने प्रशासन ने टेके घुटने, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी अवैध कब्ज़ा नहीं हटवा सका प्रशाशन

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है। कही न कही प्रशासन या तो दबंगो और रसूखदारों के दबाव में काम कर रहा है या फिर सेटिंग गेटिंग की प्रणाली पर कार्य करना शुरू कर दिया। समस्या किसी भी कारण से हो पिसती तो गरीब जनता ही है। ताजा मामला जिले की तहसील मुसाफिरखाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत दादरा का है जिसमे एक गरीब परिवार की बैनामा सुदा जमीन पर दबंगो द्वारा कब्ज़ा का लेने का है। जिसमे प्रशासन ही निरीह प्राणी की भूमिका में नजर आ रहा है।

बताते चले की कोतवाली मुसाफिरखाना की ग्राम पंच्यात दादरा निवासी राम गोविन्द पुत्र मक्कर बढ़ई ने अपनी पत्नी प्रभावती के नाम गांव के ही चंद्रावती पत्नी हंस बहादुर सिंह से गाटा संख्या 1816/0.101 वैनामा खरीदा है । वर्तमान में पीड़ित वतौर संक्रमणीय भूमिधर राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। पीड़ित ने समाधान दिवस दिनांक 06/05/2017 में लिखित शिकायत की है कि गांव के ही हंस बहादुर सिंह सुत शोभनाथ,दुर्गेश सिंह सुत हंस बहादुर सिंह ने जबरदस्ती पीड़ित की भूमि पर कब्ज़ा कर लिया है। यहाँ यह नही बताना जरूरी है की पूर्व में क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा नापकर चिन्हित भी किया गया है। लेकिन दबंगई इस कदर व्याप्त है की सरकारी चिन्हों को भी ख़त्म कर पुनः कब्ज़ा कर लिए है पीड़ित की जमीन। उपजिला अधिकारी मुसाफिरखाना के निर्देश पर उपरोक्त दबंगो के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए पुलिस ने पीड़ित का मुक़दमा धारा 434,447 में दर्ज तो कर लिया लेकिन दबंगो के कब्जे से पीड़ित की जमीन मुक्त नहीं हो पाई है। पीड़ित ने दुबारा तहसील दिवस में दिनांक 06/06/2017 को शिकायतिपत्र दिया है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इसमें प्रशासन और पुलिस की मिलभगत कहा जाय या फिर दबंगो का रसूख जिसके नीचे दबा है स्थानीय प्रशासन। अब देखना यह है कि गरीब पीड़ित को कब मिलता है न्याय या फिर योगी के रामराज्य में पिसते रहे  गरीब तबके के लोग और नंगा नाच करते रहे गें दबंग मूकदर्शर्क रहेगा प्रशासन यह तो भविष्य के गर्भ में है।

रिपोर्ट – हरी प्रसाद यादव 

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