साँप-बिच्छूओं के बीच रहे को मजबूर सिपाही वर्ग

                                                     प्रतिकत्माक

रायबरेली (ब्यूरो) कहावत है कि इंसान को रहने के लिए एक छोटी छत ही काफी होती हैं लेकिन VIP जिला कहे जाने वाले रायबरेली में कई थानों के सिपाहियों के रहने के लिए कोई सुविधा नहीं है, कोई व्यवस्था नहीं है, आवास नहीं है, वे इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं | कुछ सिपाहियों की तो ये स्थिति है कि ऐसी जगहों पर रह रहे हैं कि वहाँ बड़ी-बड़ी घास, जंगल, घने पेड़-पौधों के बीच का अंधियारा इतना छाया रहता है कि लाईट भी जलती रहती हैं तो पता नहीं चलता है | कहाँ से कोई साँप, बिच्छू व कोई जीव जंतु आ जाये ओर काट ले पता ही न चले |

आखिर क्यों ऐसे जगहों रहने को मजबूर हो रहे है उत्तर प्रदेश के सिपाही ? क्यों नहीं इनको आवास की व्यवस्था की जा रही है ? जबकि देखा जाए तो सर्दी, गर्मी, बारिश, धूप हर समय इन्हें ही सबसे ज्यादा काम करना पड़ता है | 24 घंटे जैसे भी जहाँ भी हो रात हो दिन हो इनको ही जाना पड़ता हैं तो फिर  इनके रहने की व्यवस्था क्यों नही की जा रही |आखिर इनके साथ अनदेखी क्यों ? मजबूरी में अपने जीवन को खतरे में डालकर रहने पर मजबूर है सिपाही वर्ग आखिर इनके दिक्कतों को कौन सुनेगा ?

 

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