सियासी शोर में गुम हुई कालीन उद्योग और चीनी मिल की बदहाली

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सोर्स- इन्टरनेट


भदोही(ब्यूरो)
– भदोही जिला निर्माण का ढाई दशक का वक्त बीत गया है लेकिन अभी यहां लोगों की समस्या जस की तस हैं। दुनिया में डालर नगरी के नाम से मशहूर कालीन उद्योग दमतोड़ रहा है। लाखों की संख्या में इस उद्योग में लगे बुनकर बदहाली की मार झेल रहे हैं। हैंडमेड कालीन का सुनहरा दौर खत्म हो चला अब मशीन मेड की दुनिया का आगाज हो गया है। लेकिन कई सौ करोड़ का राजस्व निर्यात के जरिए भारत सरकार को उपलब्ध कराने वाला भदोही विकास को लेकर बदहाल है। बुनकारों को जहां सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। वहीं किसान परेशान हैं। सड़कों का हाल बुरा है। स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। लेकिन जब चुनाव आता है तो जाति-धर्म पर बटन दबती है जबकि विचार और विकास हासिए पर चला जाता है। जाति-धर्म की राजनीति विकास के लिए सबसे बड़ी बाधा बनी है।

कलीन का वह दौर भी था जब हर घरों में कालीन बुनाई के कारखाने चलते थे और दिन रात खटर-पटर की आवाज सुनाई देती थी। लेकिन यह सब कुछ इतना बदल गया जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती। आज सब कुछ समाप्त हो गया। कालीन उद्योग में लगे बुनकर बदहाली और मंदी की वजह से मुंबई , दिल्ली और दूसरे शहरों का रुख कर लिये है। बाकि मनरेगा में जिंदगी आश तलाशने लगे। किसानों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई। राजनकीय नलकूप आज भी भारी संख्या में ठप हैं। नहरों में समय से पानी नहीं आता है। गांव और शहर वालों के पास गर्मी आते ही पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। भदोही शहर के लोग तो आर्सेनिकयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। यह बात शोध में भी साबित हो गयी लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। राष्टीय राजमार्ग में सड़क हादसे आम हैं लेकिन आज तक जिले में टामा सेंटर नहीं बन पाया। जिससे सरकारी अस्पताल केवल रेफरल यूनिट साबित हो कर रह गए। रामपुर गंगा घाट पर अभी तक सेतु का निर्माण नहीं हो पाया। सुरियावां में भारी आंदोलन के बाद कामायनी एक्सप्रेस का ठहराव नहीं हुआ और न ही इसे तहसील बनाया गया। कालीन उद्योग के लिए अबाध बिजली आज भी समस्या है। जिले के दक्षिण में स्थिति सीमामढ़ी को पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल सका।

भाजपा, सपा और बसपा की सरकारों में पूर्वांचल की चीनी मिलों में एक औराई स्थित दी काशी सकाकारी चीनी मिल आज तक नहीं चल पायी। जिला मख्यालय पर दस सालों से अस्पताल का निर्माण हो रहा है लेकिन वह नहीं बन पाया। लोगों के लिए रोजगार के लिए पलायन आज भी बड़ी समस्या है। हैंडपंपों में मवेशी बांधे जाते हैं हजारों हैंडपंपों को रिबोर चाहिए लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं। जिले के सभी इलाकों से आज तक रोडवेज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पायी है। विकास का वादा सभी करते हैं लेकिन सत्ता में आने के बाद सब भूल जाते हैं। भदोही में अंतिम और सातवें चरण में वोटिंग होनी है। इस बार भी यही होगा। जाति-धर्म के नाम पर ईवीएम की बटन दबेगी और विकास की आश अधूरी प़डी रहेगी। शायद जनता और विकास की यही नीयति है।

रिपोर्ट- राजमणि पाण्ड़ेय
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