जनता को भिखारी बनाने पर तुले हुए है राजनैतिक दल

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा के होने वाले बिभिन्न चरणों के मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गयी है। सत्ता प्राप्ति के लिए बिभिन्न दलों के द्वारा लोक लुभावन घोषणा पत्र पेश किए जा रहे हैं। चुनाव लड़ने वाले बिभिन्न दलों के नेता प्रदेश की जनता को भिखारी बनाने पर तुले हैं। जबकि असली मालिक यही जनता है।

जनता के एक-एक वोट से प्रदेश व केन्द्र की सरकारें बनती है। जनता द्वारा चुने गए सासंद बिधायक जनता के सेवक होते हैं। पहले मालिक सेवक से काम लेने के लिए उसे पारिश्रमिक देकर सेवा लेता था। आज समय बदल गया है। जनता के सेवकों के द्वारा सत्ता पाने के लिए देश प्रदेश के असली मालिक जनता जनार्दन को तरह तरह के प्रलोभन देकर वोंट झपटने का प्रयास किया जा रहा है।

कही मुफ्त में साइकिल लैपटॉप टैबलेट स्मार्ट फोन तो कही महिलाओं को मुफ्त में साड़ी प्रेशर कुकर रेल किराए में आधी छूट समाजवादी पेंशन के साथ नानाप्रकार के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को मुफ्त में खाना दूध फल कपडे़ बस्ता इत्यादि चीजें देकर देश के असली मालिक को भिखारी बनाने का काम जनता के सेवकों के द्वारा किया जा रहा है। जो एक शर्म का बिषय है।

देश व प्रदेश में सत्तर फीसदी लोग कृषि पर निर्भर है। अगर किसानों को खाद बीज पानी में राहत दी जाय तो किसानों की आर्थिक स्थिति स्वतः ठीक हो जायगी। रही कसर बेरोजगारों को रोजगार देकर ठीक हो सकती है। जिन चीजें की मुफ्त में देनें की घोषणाएं हो रही है। उनसे जनता का भला होने वाला नहीं है। हां इससे जनता भिखारी जरुर बन जायगी।

एक जमाना था जब किसान को भगवान् कहा जाता था। आज उसी किसान को मुफ्त में अनाज देने की घोषणा करके देश के असली मालिक को भिखारी बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। जो इस देश एवं समाज के लिए अशुभ संकेत है। जो किसान अन्न पैदा करके दूसरो का पेट भरता था। आज उसी को मुफ्त में अनाज देने की घोषणा करके सेवकों के द्वारा देश के असली मालिक का मजाक उड़ाया जा रहा है। जो आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी है।
रिपोर्ट- सोने सिंह
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