पुरवा विधानसभा का राजनीतिक सफरनामा

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पुरवा (उन्नाव) : चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद से ही सभी दलों के राजनैतिक कार्यकर्ताओ मे टिकट को लेकर तरह तरह के कयास लगाये जा रहे थे। अगर देखा जाये तो समाजवादी पार्टी का 1996 से अब तक लगातार कब्जा है वही बहुजन समाज पार्टी ने लगभग 7 माह पहले ही अपने पार्टी के प्रत्याशी की प्रभारी के रूप में घोषणा कर रखी थी। वही भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार का सूची मे नाम आते ही भाजपाईयो मे खुशी की लहर देखी गयी। यही नही लोगो ने तमाम लोगो को लड्डू खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया । वही भाजपा प्रत्याशी की घोषणा से आय दलों के प्रत्याशियों के समीकरण गड़बड़ाये पर हो कुछ भी इस समय आने वाले 19 फरवरी के चुनाव में ब्राम्हण मतदाता सभी दल के प्रत्याशियों के सर आंखो पर।

प्राप्त विवरण के अनुसार सपा, बसपा, भाजपा, के उम्मीदवारों की सूची मे नाम आने के साथ ही तस्वीर साफ हो गयी चुनावी रणभूमि मे तथा पार्टी कार्यकर्ताओ में जोश पैदा हो गया है। बताते चले कि 167 विधानसभा क्षेत्र पुरवा में 1996 से अब तक समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी विधायक उदयराज यादव का कब्जा चला आ रहा है। उदयराज 20 वर्षों से लगातार चार बार विधायक चुने गये और पांचवी बार समाजवादी पार्टी से चुनाव मैदान में है वही बहुजन समाज पार्टी ने पहला चुनाव 1989 मे उदयराज के पिता हरीशंकर यादव को प्रत्याशी बनाया था परन्तु वह जनता दल के प्रत्याशी हृदय नारायण दीक्षित से बहुत कम वोटो से चुनाव हार गये थे। वही 1991 मे मध्यावर्ती चुनाव मे बहुजन समाजपार्टी ने पुनः मास्टर हरीशंकर यादव पर दाव लगाया। परन्तु बहुत थोड़े मतो से हृदय नरायन चुनाव जीत गये। वही 1993 मे फिर मध्यावर्ती चुनाव हुआ। जिसमे सपा और बसपा समझौते मे हृदय नरायन विधायक बनें फिर क्या सपा व बसपा एलायन्स टूटा और बहुजन समाज पार्टी ने सपा से बगावत कर पार्टी संस्थापक कांशीराम के आर्शीवाद से और भारतीय जनता पार्टी की मदद से कु. मायावती जी उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री बनी। उसी समय हृदय नरायण दीक्षित सपा से बगावत कर बसपा की सरकार मे पंचायती राज एवं ससदीय कर मंत्री बने वही कु. मायावती जी मुख्यमंत्री बनते ही कई नये जिले तथा कई नई तहसीले बनाने की घोषणा करना शुरू कर दी फिर क्या बसपा नेताओं का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी को बहन कु. मायावती की बढ़ती लोकप्रियता देखी नही गयी और लगभग साढ़े चार माह मे ही भाजपा ने अपना समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी। तभी बसपा की सरकार में संसदीय कार्य मन्त्री रही पूर्ण मंत्री हृदय नरायण दीक्षित ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया और कहा हममे अपने घर वापसी की। तभी 1996 मे समाजवादी पार्टी ने उदयराज यादव का पार्टी प्रत्याशी बनाया और पूर्वमंत्री भाजपा प्रत्याशी के रूप मे वही बहुजन समाज पार्टी डा0 एम. एच. खांन को प्रत्याशी बनाया जिसमे उदयराज यादव ने पूर्व मंत्री को 1810 वोटो से हराकर पहली बार विधायक चुने गये थे। और तब से अब तक वह लगातार विधायक है इस बार बहुजन समाज पार्टी ने माही संस्था के अध्यक्ष अनिल सिंह को लगभग सात आठ माह पहले ही प्रत्याशी व प्रभारी की घोषणा कर दी थी। और बसपा की सूची मे भी अनिल सिंह बसपा के प्रत्याशी घोषित किये गये परन्तु अनिल सिंह को एक लम्बा समय मिला जिससे आज अनिल सिंह को मतदाता बईफेस भली भांति जान चुके है। और दलित मुस्लिम तथा अपने स्वाजाती वोओ को बड़ी तदाद मे लाभ बन्द करने मे पीछे नही वही लोगो को इन्तजार था की भाजपा किसे अपना उम्मीदवार बनायगी जिसमे पूर्व विधायक सुन्दरलाल लोधी भी टिकट की दौड़ में शामिल थे परन्तु भारतीय जनता पार्टी ने भी बसपा की तरह नया चेहरे के रूप में उत्तम चन्द्र राकेश लोधी को अपना उम्मीदवार बनाया है वही कुछ भी हो उत्तम चन्द्र की घोषणा होते ही चुनाव त्रिकोणीय हो गया है क्योंकि उत्तमचन्द्र पेशे से अधिवक्ता रहे है बातचीत लखनऊहा है बहुत ही मधुभाषी है परन्तु एक सर्वे के अनुसार आने वाले चुनाव मे दलित मुस्लिम ठाकुर मतदाता के अलावा निर्णायक भूमिका में ब्राम्हण वोटरो को रिझाने की पूरी कोशिश बसपा प्रत्याशी कर रहे है वही सपा प्रत्याशी स्वाजातीय यादव वोट के साथ-साथ मुस्लिम व ब्राम्हणो को अपने पाले मे लाने के लिये रात दिन एक किये हुए है भाजपा उम्मीदवार उत्तमचन्द्र लोधी अपने स्वाजातीय मतदाताओ के साथ-साथ अन्य पिछड़ी जातियों के अलावा मुख्य रूप से ब्राम्हण मतदाताओ को अपने पाले मे लाने का हर संभव प्रयास कर रहे है पर हो कुछ भी इस बार ब्राम्हण मतदाता सभी प्रत्याशियों को भा रहे है पर कौन कितनी मेहनत कर पाता है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा पर जो तस्वीर दिखाई दे रही है उससे यही लगता कि इस बार ब्राम्हण मतदाता ही निर्णायक भूमिका में है।

रिपोर्ट – मोहम्मद अहमद

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