70 वर्षो में नहीं दूर हुआ गंगा का प्रदूषण, खाली हो गया खजाना

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बलिया (ब्यूरो)- गंगा की हितचिन्ता अब सिर्फ राष्ट्रीय आन्दोलन से ही सम्भव है। परम पवित्र नदियों को मात्र आस्था का विषय समझकर ठण्डे बस्ते में डाले रहने की अन्धी परम्परा से ऊपर उठकर जरूरी है जीवन चक्र में गंगा, तमसा, अस्सी, बरूणा, गोमती आदि नदियों के महत्व की अब और ज्यादे उपेक्षा न की जाय। उक्त बातें गंगामुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने कही। वह शनिवार को विचला गंगा घाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान के पश्चात् फैली गन्दगी एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ की साफ-सफाई के पश्चात गंगा के भविष्य से स्नानार्थियों को अवगत करा रहे थे।

उन्होंने कहा कि आजाद भारत में ही गंगा की आजादी खतरमें में पड़ गयी है। श्री तिवारी ने जोर देकर कहा कि यह घोर विडंबना है कि पिछले 70 वर्षो में गंगा प्रदूषण दूर करने के नाम पर रूपये की बरबादी की गयी तथा सिंहासन पर बैठे सियासतदारों ने गंगा के असली दर्द पर परदा डालते रहने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज भी राजसत्ता में शिरकत करने वाले अविरलता की भी बात करते हैं, लेकिन नदी को अविरल करने में बाधक तत्वों की अनदेखी की जा रही है। सरकार के पास अपनी कोई राष्ट्रीय जलनीति ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि टिहरी बांध से गंगा को मुक्त नहीं किया गया तो उत्तर प्रदेश तथा बिहार का मैदानी भाग रेगिस्तान में बदल जायेगा। इस अवसर पर रविन्द्र पाण्डेय, परशुराम पटेल, पारस पाण्डेय, मनीष कुमार सिंह, उपेन्द्र यादव, समीर पाण्डेय, अमित तिवारी, विश्वामित्र मिश्र सहित कई गंगाभक्त उपस्थित रहे।

रिपोर्ट- अजित ओझा 

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