भदोही: कागजों पर जल संरक्षण की बाजीगरी, प्यासे पड़े मनरेगा में पानी के तालाब

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भदोही(ब्यूरो)- उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले में जल संरक्षण और जल स्तर को बनाए रखने हेतु मनरेगा योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन तालाब पानी की एक बूंद को तड़पते नजर आ रहे हैं। मनमानी का आलम यह रहा कि कई तालाबों में तो आउटलेट और इनलेट सिर्फ कागजों पर ही बने और कुछ जो बने भी मानकों की अनदेखी के चलते ध्वस्त हो चुके हैं। जलाशय पूर्व से ही सिर्फ हमारे नही वरन पशु-पक्षियों के जलाधार का मुख्य जल केंद्र रहे हैं। एक तो वैसे ही क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में अधिकांश तालाबों का स्वरूप अवैध कब्जाधारकों ने कब्जा जमाकर बदल दिया है। दूसरे जो तालाब खाली और खुदे हुए हैं उनमें पानी ही नही है।

शासन लगातार तालाबों में पानी भरवाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों से सचिव के माध्यम से तालाब की संख्या और सूखे तालाब की रिपोर्ट के साथ रिबोर के बंद पड़े हैंडपंप की सूची भी एकत्र कर ली गई है, किन्तु आधी गर्मी बीतने को है परंतु अब तब धरातल पर काम शुरू नही हो सका है| जिससे मवेशियों और पशु पक्षियों की प्यास नही बुझ पा रही है। कड़ी धूप और बेहाल करने वाली गर्मी में पशु पक्षी पानी न मिलने से व्याकुल नजर आ रहे हैं। सरकार के इस कागजी कार्यवाही के तामझाम, हेराफेरी और लकड़पेंच के चक्कर में आम जनमानस भी परेशान और बेहाल हैं। क्षेत्र और जनपद के लगभग हर गांवों में दो चार हैंडपम्प रिबोर के अभाव में बंद पड़े हैं मई के आधे माह बीत जाने को हैं लेकिन अब तक रिबोर करने का काम शुरू तक नही हो सका है। स्थिति जस की तस है| अतः देखना है प्रशासन की बेरुखी का शिकार हुए तालाबों की प्यास कब तक प्यास बुझ पाती हैं और बन्द पड़े हैंडपंप कब तक लोगों की प्यास बुझाने का काम शुरू कर पाते हैं।

रिपोर्ट- रामकृष्ण पाण्डेय

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