ढूंढ-ढूंढ कर गरीबों को दिया गैस कनेक्शन, अब रिफलिंग के लिए कहां से लाए पैसा

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छत्तीसगढ़ : धमतरी में पीडीएस सिस्टम के तहत करीब 1 सौ रुपए में गरीबों को महीने भर का राशन मिल जाता है, लेकिन खान पकाने के लिए उन्हें गैस सिलेंडर के लिए हर माह 726 रुपए खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में अधिकांश बीपीएल परिवारों ने तो उज्जवला योजना के तहत मिले सिलेंडरों की रिफलिंग कराना छोड़ दिया है। स्थिति को देखते हुए नए उज्जवला कनेक्शन वितरण पर भी ब्रेक लग गया है।

गरीबों की रसोई को धुआंमुक्त करने के लिए केंद्र शासन ने योजना उज्जवला के तहत बीपीएल परिवारों को 200 रुपए का पंजीयन शुल्क लेकर उन्हें गैस कनेक्शन दिया है। इस योजना के तहत अधिकारियों ने खूब मेहनत की और गरीबों को ढूंढ-ढूंढ कर रसोई गैस कनेक्शन बांटा। स्थिति देखें तो उज्जवला योजना के तहत धमतरी जिला पूरे प्रदेश में नम्बर वन पर पहुंच गया है। यहां अधिकारियों को 43 हजार परिवारों को कनेक्शन बांटने का लक्ष्य मिला था।

इसके एवज में 4 हजार ज्यादा कनेक्शन बांटे गए। समस्या यह है कि उज्जवला योजना के तहत बांटे गए गैस कनेक्शनों ने रिफलिंग की समस्या आ रही है। बीपीएल परिवारों के पास इतनी राशि नहीं है, कि वे सिलेंडरों को रिफलिंग करा सकें। गैस समाप्त होने के बाद अधिकांश घरों में सिलेंडर को रसोई के एक कोने में रख दिया गया है। गैस एजेसी संचालकों की मानें तो उज्जवला कनेक्शनों ने में से 7-8 प्रतिशत लोग ही रिफलिंग करवाने पहुंच रहे हैं।

सब्सिडी का लाभ नहीं
नए-नए नियम के चलते घरेलू गैस सिलेंडरों में दी जाने वाली सब्सिडी प्रभावित हो रही है। हितग्राहियों का बैंक और गैस कम्पनी में आधार लिंक किया गया। सब्सिडी के लिए खाता नंबर भी गैस कम्पनी का इंडेकेट किया गया है।एक हितग्राही का कई बैंकों में खाता है और सभी बैंकों ने केवाईसी के तहत उनका आधार कार्ड लिंक कर लिया है। अब समस्या यह आ रही है। निर्धारित खाते की जगह हितग्राही की सब्सिडी दूसरे खातों में जा रही है।

महिला रूखमणी को उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर मिला है। गैस तो माहभर पहले ही समाप्त हो गई, लेकिन गैस सिलेंडर में रिफलिंग का मूल्य अधिक होने से वह उसकी रिफलिंग नहीं करा पा रही है। अब फिर से उनके घर चूल्हे से खाना बन रहा है।

महिला देवकी साहू को भी उज्जवला योजना के तहत सिलेंडर और गैस चूल्हा मिला हुआ है। जब तक गैस चली उसने इसी से खाना बनाया, अब गैस समाप्त होने के बाद रिफलिंग के लिए उसके पास राशि नहीं है।

उज्जवला योजना के तहत जिले में अच्छा काम हुआ है। यहां लक्ष्य से ज्यादा कनेक्शन बाटे गए हैं। हितग्राही धीरे-धीरे रिफिलिंग के लिए पहुंच रहे हैं।

रिपोर्ट–हरदीप छाबड़ा

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