किसानों की कर्ज माफी से ईमानदार कर्म संस्कृति पर पडे़गा सकारात्मक प्रभाव

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बलिया ब्यूरो : लोक स्वातन्त्र्य संगठन पीयूसीएल की जिला इकाई ने किसानों की कर्ज माफी को लेकर रिजर्व बैंक द्वारा सरकार को दी गयी चेतावनी को किसान विरोधी व संवेदनहीनता का द्योतक बताया है। रिजर्व बैंक ने सरकार को चेतावनी दिया है कि किसानों की कर्ज काफी से वित्तीय घाटा होगा और ईमानदार कर्ज संस्कृति पर बुरा प्रभाव पडे़गा। संगठन ने रिजर्व बैंक की इस चेतावनी की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा है कि किसानों की कर्ज माफी से ईमानदार कर्म संस्कृति पर सकारात्मक प्रभाव पडे़गा। साथ ही कर्ज के बोझ से छटपटा कर आत्महत्या कर रहे किसानों के अंदर राहत की उम्मीद जगेगी।

संगठन की बैठक में देश में जगह-जगह भड़क रहे किसान आंदोलनों पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी। कहा गया कि किसान की स्थिति बद से बदतर हो रही है। महाराष्ट्र के नासिक में प्याज सड़ रहा है और किसान प्याज को मंडी में बेचने की जगह खेतों में फेंक रही है। इस स्थिति ने यहां पांच किसानों की बलि ले ली। तमिलनाडु के 134 किसानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 40 दिनों तक अहिंसक प्रदर्शन किया। भयंकर सूखा से पीड़ित ये किसान कर्ज माफी की मांग कर रहे थे। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए इन किसानों ने अपना पेशाब तक पिया। लेकिन केन्द्र सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। मध्यमप्रदेश के नर्मदा नदी में 213 किसान 32 दिन तक जल सत्याग्रह करते रहे। किसानों के पॉव सड़ गये लेकिन सरकार मौज मस्ती में डूबी रही। बैठक में आजाद हिन्दुस्तान की इन सरकारों को चम्पारण के नीलहे अंग्रेजों की संज्ञा दी गयी। संगठन ने निर्णय लिया है कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जनता के बीच मुहिम चलाया जायेगा, तब तक सरकार चुनावी घोषणा पत्र में किसानों की बेहतरी के लिए गयी घोषणाओं को लागू नहीं करेगी, संगठन की मुहिम जारी रहेगी।

बैठक में रणजीत सिंह, डा.अखिलेश सिन्हा, असगर अली, लक्ष्मण सिंह, सूर्यप्रकाश सिंह, विनय तिवारी, पंकज राय, अमरनाथ यादव, गोपालजी, प्रदीप सिंह, डा.हरिमोहन, अरूण सिंह, शैलेश धुसिया, ज्योति स्वरूप पाण्डेय, बब्लू सिंह आदि उपस्थित रहे।

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