प्रदेश में कानून का राज नहीं बल्कि गुण्डों का राज है : डीके

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रायबरेली(ब्यूरो)- होटल सूर्या में आयोजित प्रेस-वार्ता में पिछड़ा-अल्पसंख्यक दलित आदिवासी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीके आनन्द ने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ को एक असफल मुख्यमन्त्री कहा। प्रदेश में कानून का राज नहीं बल्कि गुण्डों का राज हैं सरकार में बड़े पदों पर बैठे अधिकारी जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाए सरकार के गुणगान में लगे हैं, जिलों के अधिकारी भाजपा के सांसद एवं विधायकों के हाथ की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं, जिसका जीता-जागत प्रमाण जनपद ग्राम अपटा में 26 जून 2017 को हुआ प्रदेश का सबसे बड़ा कान्ड है, जिसमें मृतकों के पक्ष में जहाँ मृतकों की जाति के लोग खड़े हुए वहीं अभियुक्त के पक्ष में उनकी जाति के लोग खड़े हुए। मुख्यमन्त्री द्वारा मृतकों के परिवारों को पाँच-पाँच लाख रूपया, एक नौकरी तथा शस्त्र देने की घोषण करा दी, किन्तु उसी घटना में घायल हुआ घटना का चश्मदीद गवाह अमृत लाल प्रजापति को प्रशासन ने मुआवजा दिलाने की बात मुख्यमन्त्री ने क्यों नहीं कही।

जिला प्रशासन ने घटना के मृतकों को इंसान मानकर उनका पूर्ण सहयोग किया, स्वाभाविक है, किन्तु इस घटना के घायल प्रजापति को अस्पताल में जीवन एवं मृत्यु से जूझ रहा था, उसके जान की रक्षा के विशेष इलाज की व्यवस्था क्यों नहीं करायी, क्या इसलिए कि अगर वह जिन्दा रहा तो कही आँखो देखी, घटना का सच-सच बयान कर देता कि पूरे गाँव के लोग लाठी-डण्डा से पाँचों को मार रहे थे। प्रदेश में योगी सरकार के चौथे महीने में हुई, यह घटना प्रदेश के सबसे बड़ी घटना है। मुख्यमन्त्री, मन्त्री एवं नेता विरोधी दल ने सदन में चर्चा की, किन्तु इस घटना में घायल चश्मदीद गवाह प्रजापति जिन्दा है, उसके जीवन की रक्षा के लिए विशेष प्रबन्ध किया जाना चाहिए, यह आवाज किसी भी राजनैतिक दल सदन में नहीं उठायी। यह सब साबित करता है कि यह प्रदेश की सरकार प्रजातंत्र में विश्वास नहीं करती, इसलिए गरीबों को शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा उपलब्ध कराने नहीं चाहती। आज पूरे प्रदेश में हत्या, लूट, सामूहिक बलात्कार की घटनाएँ को रोकने में प्रशासन एवं शासन पूरी तरह असफल है।

प्रदेश के 75 जिलों में प्रतिदिन कहीं न कही हत्या, लूट, सामूहिक बलात्कार की घटना हो रही है। प्रदेश में कोई सुरक्षित नहीं है। हम इस प्रेस-वार्ता के जरिये जिला प्रशासन से कहना चाहते है कि वह कानून के साथ खिलवाड़ करना बन्द करें, प्रजापति को 26 जून 2017 को सीएचसी ऊँचाहार में भर्ती कराया गया था, वही उसका मेडिकल मुआयना हुआ है, बाद में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। 21 दिनों बाद उनकी मृत्यु हुई है। इस तरह घटना में मरने वाले छठे व्यक्ति प्रजापति है। इसलिए जहाँ जिला प्रशासन ने घटना पर मरने वाले पाँच व्यक्तियों को पाँच-पाँच लाख रूपया मृतक आश्रितों को तथा परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी एवं शस्त्र लाइसेन्स देने की सिफारिश प्रदेश से की है, तो उसी घटना में घायल के इक्कीस दिन बाद मरने पर उसके परिवार को भी पाँच लाख रूपया तथा मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी एवं शस्त्र लाइसेन्सी देने की सिफारिश सरकार से करें अन्यथा हमारा संगठन इस मृतक प्रजापति के परिवार को न्याय दिलाने के लिए लोकतान्त्रिक ढंग से तत्काल जिला स्तरीय बैठक आयोजित की जायेगी तथा शीघ्र ही जिला मुख्यालय रायबरेली पर लोकतान्त्रिक ढंग संघर्ष की घोषणा किया जा रहा है।

रिपोर्ट- अनुज मौर्य

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