जनपद प्रतापगढ़ में विधानसभा चुनाव 2017 भितरघात के बीच संपन्न

0
229

प्रतापगढ़(ब्यूरो)– जनपद प्रतापगढ़ में विधानसभा चुनाव 2017 भितरघात के बीच संपन्न हुआ जनपद में सात विधानसभा है| कुंडा बाबागंज रामपुर संग्रामगढ़ प्रतापगढ़ विश्वनाथगंज पट्टी रानीगंज इन विधानसभाओं में कुंडा रामपुर को छोड़कर बाकी की बची विश्वनाथगंज प्रतापगढ़ पट्टी बाबागंज रानीगंज इन विधानसभाओं में विधिवत अपनी ही पार्टी में टिकट मांग रहे प्रत्याशियों के द्वारा या तो कार्यकर्ताओं के द्वारा लंबा भितरघात चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को अपने ही लोगों से ज्यादा खतरा उत्पन्न हो गया है| यह बात कोई नई नहीं है यह तो प्रतापगढ़ जनपद में हमेशा से हो रहा था परंतु इस विधानसभा चुनाव में ज्यादा देखने को मिल रहा है|

प्रतापगढ़ जनपद का चुनाव संपन्न हो गया तो कहीं खुशी कहीं गम यह भी सामने आने को तैयार है| कुछ विधानसभाओं में तो प्रत्याशियों ने वोटरों से वोट मांगना ही नहीं पसंद किया| इसका कारण यह है कि प्रत्याशियों को समाज के कुछ वर्ग के लोग उनके साथ आ गए थे इसलिए वो छुटभैया नेताओं को तवज्जो नहीं दिए और वोट मांगना नहीं पसंद की है कुछ नेता तो वैसे दिखे जो शीशा चढ़ा कर गाड़ी पर फर्राटा भरते हुए चले जाते थे| वह गाड़ी के निकल जाने के बाद पीछे से मतदाताओं को केवल धूल ही फाकना पडता था परंतु गाड़ी निकल जाने के बाद मतदाताओं का यह कहना था कि जब चुनाव के वक्त प्रत्याशियों की यह हाल है तो विधायक बन जाने के बाद यह तो जनता के बीच में तथा विधान सभाछेत्र के बीच में आना मुनासिब नहीं समझेंगे| बस इसी की मार चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को महंगा पड़ सकता है| रही बात समाज में ठेकेदारों की तो इन ठेकेदारों ने जिन प्रत्याशियों का दामन थाम लिया था, उनका तो बेड़ा गर्क होना निश्चित माना जा रहा है|

यह बातें विधानसभा के उन मतदाताओं की है, जिन लोगों ने आजतक बिधायक बनाकर भेजा और उनका दर्शन गरीबों की झोपड़ी तक नहीं मिला इसका कारण यह है कि राजनीति का माहौल जनपद प्रतापगढ़ में कुछ अलग अंदाज का होता है| यही हाल मतदाताओं का भी रहा है जिन्हें जिला प्रशासन के कर्मियों के द्वारा अपने मतों का अधिकार भी नहीं मिला है वही कुछ पूर्व प्रधान जिंदा तो हैं परंतु उनका नाम वोटर लिस्ट में विलोपन कर दिया गया है ऐसे लोगों में जिला प्रशासन की इस कार्यवाही से खासा रोष है तो वहीं दूसरी तरफ बुजुर्गों मतदाता जिंदा तो है उनके दिल में आस थी कि अब की बार मैं वोट देकर विधायक बनाऊंगा परंतु उनका भी सारा सपना उनके दिल में धरा का धरा रह गया| इसका कारण यह रहा है की मतदाता सूची में प्रति गांव के हिसाब से कम से कम 25 या 30 लोगों का मतदाता सूची से नाम गायब है| बड़े जज्बे के साथ वह अपने घर से निकलकर आधार कार्ड वोटर id अपनी जेब में रखकर बूथ तक पहुंचे परंतु किसी की गलती के चलते उनका सपना उन्ही के पास धरा का धरा रह गया और वह वोट देने से वंचित रह गए और अपने को अपमानित महसूस करके मतदान केंद्र के बाहर का रास्ता देखना पड़ा कुछ लोगों ने तो मतदान केंद्र पर जानने की कोशिश किया परंतु उनके साथ कड़ाई का पालन किया गया और वह अपने को अपमानित महसूस करके बाहर निकल आए|

कई लोगों ने तो बाहर निकलने के बाद अपने ही गांव के लोगों के ऊपर भड़ास निकाल ली परंतु सारा मामला जिला प्रशासन का खेल है रही बात 2017 के चुनाव की तो विधानसभा चुनाव के मतदाता यह सोचने को मजबूर होता है कि आखिर मत प्रतिशत क्यों कम पडा क्या ग्रामीण इलाकों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम हवा-हवाई रहा यह भी चर्चा का विषय ग्रामीण इलाकों में जोरों पर है| सबसे बड़ी चर्चा तो यह भी है जो मतदाता जिंदा है उसका वोटर लिस्ट में नाम नहीं है जो मतदाता मर चुका है| इस दुनिया में नहीं है उसका नाम वोटर लिस्ट में है यह भी चर्चा चाय पान की दुकानों पर मतदाताओं के बीच सुनने को मिल रही है| अब आने वाला वक्त बताएगा कि विधानसभा की नैया को प्रतापगढ़ जनपद के कौन से विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे|

रिपोर्ट- अवनीश कुमार मिश्रा
हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here