गठबन्धनों का गढ़ रहा है प्रतापगढ़, अजीबो-गरीब हो सकता है जनता का फैसला

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प्रतीकात्मक
प्रतीकात्मक

प्रतापगढ़ : लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी एवं अपना दल गठबंधन के प्रतापगढ़ लोकसभा के प्रत्याशी कुंवर हरिवंश सिंह ने लोकसभा चुनाव जीत दर्ज कीं | गठबंधन धर्म तथा एक वोट देश के नाम ने कुंवर हरिवंश सिंह को लोकसभा की नैया पार करा दी |

उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जनपद इतिहास और राजनीति के मायने में किसी भी जनपद से कम नहीं रही बात 2014 में काला कांकर राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह को कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था तो भारतीय जनता पार्टी अपना दल ने जौनपुर जनपद के निवासी कुंवर हरिवंश सिंह को संयुक्त प्रत्याशी बनाया था तो समाजवादी पार्टी ने प्रमोद कुमार सिंह पटेल को जो इलाहाबाद के निवासी हैं को को प्रत्याशी बनाया था तो बहुजन समाज पार्टी ने आसिफ सिद्दीकी को लोकसभा प्रतापगढ़ का प्रत्याशी बनाया था सब को मात देते हुए लोकसभा की लड़ाई को लड़कर जौनपुर निवासी कुंवर हरिवंश सिंह सांसद तो बन गए सांसद बनने में विधानसभा रामपुर विश्वनाथगंज प्रतापगढ रानीगंज पट्टी यह 5 विधानसभा की जनता ने अपने मत का प्रयोग करके कुंवर हरिवंश सिंह को सांसद बनाया तो वही प्रतापगढ़ के दिग्गज राजनैतिक धुरंधरों को इस चुनाव में अपनी मुंह की खानी पड़ी प्रतापगढ़ जनपद में भारतीय जनता पार्टी बहुजन समाज पार्टी समाजवादी पार्टी तथा अपना दल से कई दिग्गज जो अपनी पकड़ राजनीत के छेत्र में 5 वर्ष तक सेवा करते रहे और एक दूसरे पर वार करते रहे इस का नजारा साफ दिखाई दे रहा है |

प्रतापगढ़ जनपद के काला काकर राजघराने की राजकुमारी को एक मात्र टिकट कांग्रेस से मिला था, बाकी समस्त पार्टियों पर लोकसभा का टिकट बाहरी लोगों को देकर प्रतापगढ़ के राजनीति करने वाले धुरंधरों का सफाया हो गया | अगर गौर करें तो 5 विधानसभा के मतदाताओं ने क्षेत्र के व्यक्ति को सांसद तो बना दिया परंतु अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली यह जनपद प्रतापगढ़ का इतिहास में गठबंधन का धर्म रहा है | 2017 विधानसभा चुनाव में गठबंधन धर्म निभाने वाले कार्यकर्ता एवं राजनेताओं को करारा जवाब जनपद की जनता से मिलेगा, 23 फरवरी चुनाव का दिन अहम होगा, मतदाता कौन सा धर्म निभाएगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा क्योंकि प्रतापगढ़ जनपद का मतदाता बहुत ही जागरुक है, यह जागरुक मतदाता कांग्रेस भाजपा समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी व अन्य पार्टियों को देख चुकी है, इस चुनावी बाजार में हर कोई छुटभैया नेता अपनी बात कहने से बाज नहीं आ रहा है, अपनी बात कहने को सब को हक है लेकिन तथाकथित लोग अपनी ही बात मनवाने पर तथा फैसला सुनाने में माहिर हैं | अभी बात 2017 के चुनाव की है, तो इस चुनाव का परिणाम अजीबोगरीब आने की संभावना है क्योंकि मतदाता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है, इसीलिए जनता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है एक कहावत है नेता मस्त जनता त्रस्त !

रिपोर्ट – अवनीश कुमार मिश्र

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