उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतापगढ़ पर विशेष

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pratapgarh
प्रतापगढ़ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतापगढ़ जनपद का इतिहास हमेशा से ही विशेष स्थान रखता है | आज हम आपको 2009 में लोकसभा चुनाव का आकलन पेश कर रहे हैं | प्रतापगढ़ जनपद में कुंडा बिहार रामपुर संग्रामगढ़, गडवारा, सदर विधानसभा को मिलाकर एक लोकसभा सीट बनी थी उस सीट पर सांसद प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस से सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने 2009 में चुनाव जीतकर अपना परचम लहराया इन के विरोध में बहुजन समाज पार्टी ने शिवाकांत ओझा को मैदान में उतारा था, वहीं भारतीय जनता पार्टी से रामाशंकर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था, तो समाजवादी पार्टी से सांसद रहे अक्षय प्रताप सिंह उर्फ़ गोपाल जी को पार्टी ने प्रतापगढ़ लोकसभा से प्रत्याशी बनाया था, परंतु कांग्रेस सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने बाजी मारी | गौरतलब है कि विधानसभा के विधायकों के ऊपर बहुजन समाज पार्टी की सरकार सुबह में चल रही थी जिसमें सदर विधानसभा से संजय तिवारी गढवारा विधानसभा से बृजेश मिश्र सौरभ बीरापुर विधानसभा से रामशिरोमणि शुक्ला रामपुर संग्रामगढ़ से आदर्श विधायक प्रमोद तिवारी तथा कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह बिहार विधानसभा से विनोद सरोज यह 7 विधायक मौजूद थे लोकसभा सीट सदर गडवारा रामपुर संग्रामगढ़ कुंडा एवं बिहार विधानसभा के मतदाताओं को सांसद चुनना था जबकि बसपा से शिवाकांत ओझा चुनाव लड़ रहे थे तीनों बसपा विधायकों ने शिवाकांत ओझा के साथ भितरघात किया था इसी वजह से बसपा के शिवाकांत ओझा चुनाव हार गए और कुछ समय के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी ज्वाइन करके रानीगंज विधानसभा से टिकट लेकर चुनाव जीता और समाजवादी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने |

अब रही बात 2017 के चुनाव में तो इसका परिणाम कुछ अलग ही होगा क्योंकि प्रतापगढ़ जनपद में किसी को टिकट मिला तो किसी को नहीं इसी वजह से विरोध उत्पन्न हो गया है और टिकट पाने वाले प्रत्याशियों के लिए अपने ही दल के लोगों से ज्यादा खतरा उत्पन्न हो जाता है, यह 17 का चुनाव इसी भीतरघात को देखते हुए आज भारतीय जनता पार्टी एवं अपना दल ने पूरे प्रदेश में गठबंधन किया है तो इससे अछूती समाजवादी पार्टी एवं कांग्रेस पार्टी उत्तरप्रदेश में गठबंधन कर चुकी है अब रही बात किसी भी पार्टी से टिकट मांगने वालों की संख्या ज्यादा होती है तो सभी पार्टियों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती की बात होती है ऐसे में किसी एक को टिकट दिया जाता है तो बाकी के बचे पार्टी के नेता बगावत पर उतारू हो जाते हैं इसीलिए पार्टी को भारी भरकम नुकसान होता है आप 17 के चुनाव में सबसे बड़ी खास बात यह है कि बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर का नेता हर खेमे में हर टिकट आर्थी के साथ अलग-अलग रूप में देखा जाता है इसीलिए पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान होता है |

रिपोर्ट – अवनीश कुमार मिश्रा

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