पुलिस की मनमानियों के चलते कोर्ट का कीमती समय हो रहा बर्बाद

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सुलतानपुर : गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में भी अब पुलिस एफआईआर दर्ज करने को राजी नहीं है। नतीजतन जो काम पुलिस को पहले ही कर लेना चाहिए,वह काम भी अदालत का कीमती समय नष्ट करवाने के बाद पुलिस कर रही है। पुलिस ने गैंगरेप, हत्या व फर्जीवाड़े से जुड़े तीन गंभीर मामलों में एफआईआर नहीं दर्ज किया था, जिसके संबंध में एसीजेएम चतुर्थ मनीष निगम की अदालत ने संबंधित थानाध्यक्षों को एफआईआर दर्ज कर जांच का आदेश दिया है।

पहला मामला जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है। इसी क्षेत्र के जयसिंहपुर कस्बा निवासी आरोपी संजय, लवकुश व बरूई गोसाईगंज निवासी उनके रिश्तेदार के खिलाफ एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए है। आरोप के मुताबिक बीते 3 सितंबर की रात में वह बच्चों के साथ सोई हुई थी। इसी दौरान तीनों आरोपी उसके घर में घुस आये और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इस दौरान आरोपियों पर जेवरात भी लूटने का आरोप है। इसी मामले में पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के बाद भी मुकदमा दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा। जिसके संबंध में पीड़िता की अर्जी पर एसीजेएम चतुर्थ की अदालत ने संज्ञान लिया है।

दूसरा मामला कुड़वार थानाक्षेत्र के हसनपुर का है। जहां के रहने वाले सब्बन ने आरोपी मोहर्रम अली निवासी उसुरी बल्दीराय,उसकी पत्नी, हसनपुर निवासी शेरअली, साजिद अली, बउआ एवं अपनी सगी बहन गुड़िया के खिलाफ ही गंभीर आरोप लगाते हुए अदालत में अर्जी दी। आरोप के मुताबिक उसकी बहन मोहर्रम से परिवार की सहमति के बगैर ही शादी करना चाहती थी। जिस पर घरवालों को ऐतराज था। इसी बीच मोहर्रम ने दूसरी शादी भी कर ली और अभियोगी की बहन गुड़िया को हमवार कर झांसा दिया कि वह अपने पिता मो. अजीम को मार डाले तो वह उसे भी अपने साथ रखेगा। आरोप के मुताबिक मोहर्रम के झांसे में आकर अन्य आरोपियों की मदद से अभियोगी के पिता अजीम को 1 फरवरी 2007 को भोजन में जहर देकर गुड़िया की मदद से मार डाला गया। इस मामले में भी पुलिस ने सूचना के बाद भी कार्यवाही करना जरूरी नहीं समझा। जिसे अदालत ने गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया।

तीसरा मामला लम्भुआ थानाक्षेत्र के जोधनपुर (मधुबन) गांव का है। जहां के रहने वाले रामबहादुर निषाद के साथ सुरेखा निवासिनी सरायरानी कादीपुर का विवाह हुआ था। आरोप के मुताबिक दहेज की मांग न पूरी होने पर पति राम बहादुर, देवर लाल बहादुर व ननद संजू, सास प्रभावती, ससुर रामजीत ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया और फर्जी सुलहनामा के सहारे अपना बचाव करने का प्रयास किया। यह फर्जीवाड़ा का मामला अदालत पहुंचा तो कार्यवाही के लिए आदेशित किया गया। तीनों ही गंभीर ही मामलों में पुलिस की लापरवाही देखने को मिली। जिसके संबंध में अदालत के समक्ष अर्जियां पड़ने पर संबंधित थानाध्यक्षों को प्रकरण की एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए गये है।

ऐसा ही एक मामला कोतवाली देहात थाना क्षेत्र स्थित अभियाकला से जुड़ा है।जहाँ की रहने वाली दलित वृद्ध महिला सुमेरा देवी व उसके बेटे अवधेश को फोरलेन मुआबजे में मिली 82.78 लाख रूपये की रकम जालसाजों ने हड़प ली है।आरोप के मुताबिक सुमेरा के गाँव के ही सुरेमन वर्मा ने अपनी पत्नी व अपने करीबी उदयराज वर्मा व उसके बेटे निवासीगण लोदीपुर की साथ मिलकर पीड़ित माँ-बेटे को मुआबजे की रकम जल्दी दिला देने के नाम पर धोखे से कई कागजातो पर अंगूठे लगवाए और दोनों के खाते से 82.78 लाख रूपये उदयराज ने अपने सिंडिकेट बैंक(निकट आस्था हॉस्पिटल)के खाते में ट्रांसफर करवा लिए।बीते 4 फरवरी को खाता चेक करवाने पर जब सुमेरा को इस खेल की जानकारी हुई तो उसने सुरेमन वर्मा से इस बावत पूंछा तो उसे जान से मरवा डालने की धमकी भी मिली।कोतवाली पुलिस व क्षेत्राधिकारी नगर को मिलकर सुमेरा ने 10 दिन पहले ही प्रकरण की सूचना दी।लेकिन अभी तक उदयराज आदि के विरुद्ध कार्यवाही तो दूर पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नही किया है। वही सूत्रों की माने तो धोखे से हड़पे गये इन लाखो रूपयो से उदयराज गाँव में ही आलीशान मकान बनवा रहा है।जबकि उसके पास आमदनी का कोई ख़ास जरिया नही है।ऐसे में आखिर सुमेरा व उसके बेटे के खाते से उदयराज के खाते में लाखों रूपये क्यों और किन परिस्थितियों में ट्रांसफर हुए इस वजह को भी पुलिस पूछने-जानने का भी प्रयास नही कर रही है।सूत्रों की माने तो मामला सुर्खियों में आने के बाद से ही उदयराज वर्मा अपने कारनामे को दबाने के लिए सक्रिय हो गया और उसी हड़पे गई रकम में से कुछ हिस्सा पुलिस को भी दे दिया।शायद यही वजह है कि सूचना के 10 दिनों बाद भी एफआईआर नही दर्ज हो सका है और प्रकरण के बावत जानकारी लेने पर पुलिस अधिकारी भी आरोपियो के बचाव में गोल मोल जवाब दे रहे है।पुलिस की यही दशा रही तो शायद जल्द ही न्याय के लिए दर दर की ठोकरें खा रही सुमेरा देवी को भी कोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी।फिलहाल अब भी देखना है कि पुलिस का ज़मीर जागता है या फिर धोखेबाजों से ही मिलकर मामले को हजम कर ले जाते है।

रिपोर्ट – दीपक मिश्र

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