प्रेमिका के प्रेम पास में बंधकर, माँ, पत्नी और मासूम बेटी की ह्त्या करने वाले को मिली फांसी की सज़ा

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अम्बेडकरनगर (ब्यूरो)- आखिरकार जन्म दायिनी मां, जीवन सारथी पत्नी और दिव्य ज्योति बच्ची की निर्मम हत्या करने वाले हत्यारे क्रमशः, बेटे, पत्नी और पिता को जिला न्यायालय ने मौत की सजा सुना ही दी है। इस सज़ा के बाद भले ही भारतीय परम्परा के अनुसार बने इन बेहद कोमल रिश्तों की डोर अधिक मजबूत न हो सके लेकिन एक बात तो तय है कि कानून से खेलने वालों के होश अवश्य ही ठिकाने लगे होंगे | साथ ही, देर से ही सही किंतु तीनों मृत्यु आत्माओं को न्याय मिल ही गया ऐसा भी समझ का हम भी संतोष कर सकते है।

कहते हैं बुराई कितनी भी भारी क्यों न हो सच्चाई के आगे उसे घुटने टेकने ही पडते हैं। इस तरह की कहावतें आज अक्षरसः सत्य साबित तब होतीदिखी जब आज अम्बेडकरनगर के न्यायालय में एक बेहद क्रूरता के साथ अंजाम दिए गए मामले पास नयायाधीश ने अपना फैसला सुनाया | आपको बता दें कि आज जिला सत्र न्यायालय में 2013 के एक केस पर सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीश म्रदुल कुमार मिश्र ने एक आरोपी अपराधी को फांसी की सजा सुना दी|

यह भी बताते चले कि जिन हत्याओं के मामले में अपराधी को फाँसी की सजा सुनाई गयी है वह हत्याएं उसने किसी और की नहीं अपितु अपनी ही माँ, पत्नी और मात्र 6 वर्ष की बेटी की थी | बताते चले कि 19 अप्रैल 2013 की सुबह रामगोपाल सैनी की मां वर्षीय कामा देवी(70) वर्षीय पत्नी वर्मा (28) वर्षीय कंचन और पुत्र धैर्य(6) वर्षीय का संदिग्ध परिस्थितियों में घर के अंदर ही मृत शव पाया गया था।

दिल्ली के लिए रवाना हुआ था अपराधी –
घटना के दौरान रामगोपाल सैनी ने खुद को पुलिस के हथकंडे से बचने के लिए स्वयं को घटना से पहले नाटकीय ढंग से दिल्ली में एक शादी में शामिल होने के लिए 18 अप्रैल की शाम को ही घर से जाने की बात बताया था और जब उसे फोन पर घटना बताई गई तो वह घर वापस आ गया। तत्कालीन कोतवाल ओमबीर सिंह की यह कहानी रास नहीं आई जिस पर उन्होंने घटना की जांच-पड़ताल शुरु कर दी और कोतवाल ओमवीर सिंह ने आखिरकार अपनी पड़ताल में यह बात सच साबित किया कि उसने दिल्ली जाने का बहाना मात्र किया था वह दिल्ली नहीं गया था।

नहीं पहुंचा था दिल्ली-
जिससे सर्विलांस में उसका लोकेशन जिले में ही निकला था। जब वह दिल्ली जाने की बात बता रहा था यही से पुलिस का शक उसके ऊपर और गहरा हो गया था पुलिस ने पड़ताल में दिन दूनी, रात चौगुनी की तरह वर्क आउट करके रामगोपाल सैनी को अपने ही परिवार का हत्यारा मानते हुए चार्जशीट कोर्ट को भेज दिया था। सही मायने में रामगोपाल सैनी ने दूसरी महिला के प्रेम प्रसंग के चलते ही अपनी मां पत्नी और बच्ची को अपने प्रेम प्रसंग के रास्ते का कांटा समझकर इस भयानक वारदात को अंजाम दिया था। रामगोपाल सैनी का सपना था कि पुलिस कुछ नहीं जान पाएगी और वह दूसरी शादी कर के ऐसोआराम से रंगरलिया मनाते हुए अपनी जीवन को व्यतीत करेगा। लेकिन कहते हैं किस्मत को जो मंजूर होता है असल में होता वही है।

प्रेमिका के प्रेम पांस में फसने की वजह से हुई ह्त्या-
घटना का क्रम कुछ इस तरह से है कि सुबह मिले तीनों शव से पूरे नगर में सनसनी फैल गयी थी। पुलिस भी इस सनसनी खेज घटना को लेकर किसी अन्जाम तक नहीं पहुंच पा रही थी। इस घटना में पुत्र धैर्य का लाश शौचालय में उल्टे मुंह पाया गया था। पोस्टमार्टम में सभी की मृत्यु जहर से होने की पुष्टि हुई थी। विवेचना के उपरान्त पुलिस ने रामगोपाल को ही हत्या का दोषी का करार दिया था। हत्या का कारण बगल में ही रहने वाली एक महिला से रामगोपाल सैनी की अवैध संबंधो का होना बताया गया।

पुलिस ने इस हत्या के आरोप में रामगोपाल को गिरफ्तार कर लिया था। तीन साल तक चली अदालती सुनवाई के उपरान्त अपर जिला जज तृतीय मृदुल कुमार मिश्र ने इस जघन्य तिहरे हत्या कांड के लिए रामगोपाल सैनी को मृत्यु दंड की सजा सुनायी। न्यायालय का फैसला आते ही न्यायालय कक्ष में सन्नाटा पसर गया। न्यायाधीश ने इस फैसले को सुनाने के बाद कलम को तोड़ दिया। वही सजा सुनाने के बाद अभियुक्त इस कदर फफक-फफक कर रोने लगा मानो कि उसकी आत्मा वही की वही निकल गई हो। वही बचाव पक्ष के अधिवक्ता के समझाने बुझाने के बाद किसी तरह उसके आंसू रुक सके। और उसे सब्र का पानी भी पिलाया गया।

अंबेडकरनगर जिला न्यायालय में दूसरी बार किसी अपराधी को सुनाई गई फांसी की सजा-
बताते चलें कि इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के एक कानूनगो की निर्मम हत्या करने के बहुचर्चित मामले में एक आरोपी अभियुक्त को जनपद न्यायालय में वर्ष 2008 में फांसी की सजा सुनाई थी। वही जिला अंबेडकरनगर के सृजन वर्ष 1995 के बाद यह अंबेडकरनगर न्यायालय द्वारा दी गई दूसरी ऐसी घटना है जिसमें हत्यारे को फांसी की सजा का फरमान जारी किया गया जिससे न्याय के इस मंदिर से लोगों का विश्वास और मनोबल और बढ़ गया है।

रिपोर्ट-सर्वेश गुप्ता

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