काशी पत्रकार संघ में फर्जी पत्रकारों की सदस्यता बचाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी

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वाराणसी(ब्यूरो)- काशी पत्रकार संघ में वर्षों से दवा व्यापारी सहित फर्जी पत्रकारों की सदस्यता को लेकर क्लाउन टाइम्स ने कई बार सवाल खड़ा किया। इस बार के चुनाव में भी अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुभाष सिंह को निवर्तमान अध्यक्ष बीबी यादव के खिलाफ इसी लिए जीत हासिल हुई कि वे इनका सफाया करने के साथ ही अबतक हुई खामियों को सुधारेंगे पर वे पूरी तरह फ्लाप साबित हो रहे हैं। फिर भी उन्होंने जिन गैर पेशेगत कथित पत्रकारों को संघ की सदस्यता से वंचित करने का प्रयास किया गया है। ऐसे कथित पत्रकारों को अपने निजि स्वार्थ के लिए उनकी सदस्यता बचाने और अपने वजूद की अन्तिम लड़ाई लड़ने की गरज से जनसंदेश के पत्रकार जितेन्द्र श्रिवास्तव ने वर्तमान अध्यक्ष सुभाष सिंह आदि के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी के क्रम में सदस्यता अभियान की शुरूआत कर दिया है।

नाम न छापने की शर्त पर संघ के एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि जितेन्द्र श्रिवास्तव मेरे पास अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के लिए पत्र लाया था जिसे मैंने यह कहते हुए मना कर दिया कि मैं किसी विवाद में पड़ने वाला नहीं हूँ। श्री जितेन्द्र ने अपने अभियान को दमदार बताते हुए दिखाया कि 130 सदस्यों ने इसपर हस्ताक्षर कर दिया है, फिर भी उसे बैरन वापस जाना पड़ा क्योंकि वरिष्ठ पत्रकार साथी ने नजर में जितेन्द्र जैसे लोगों का कोई वजूद नहीं है।

वर्तमान अध्यक्ष सुभाष सिंह ने बड़े ही साफगोई के साथ बताया कि नियमानुसार फर्जी पत्रकारों को सदस्यता से वंचित किया गया है| उन्हें बहाल कराने के लिए अनावश्यक दबाव बनाने लिए ऐसा किया जा रहा है। जिसकी अपील कोई भी कार्यसमिति के सामने कर सकता है। इससे भी संतुष्ट न होने पर वो साधारण सभा में अपना मामला रख सकता है। ये अभियान तो अनावश्यक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

उक्त पत्रकार साथी ने खुलासा किया कि काशी पत्रकार संघ में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वहाँ जितेन्द्र श्रिवास्तव वर्तमान पदाधिकारियों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। क्लाउन टाइम्स ने भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काशी पत्रकार संघ के वर्तमान अध्यक्ष सुभाष सिंह और जितेन्द्र श्रिवास्तव से उनका पक्ष जानने के लिए फोन लगाया तो श्री सुभाष ने अपना पक्ष रखा किन्तु श्री जितेन्द्र सवाल सुनते ही भाग खड़े हुए। जहाँ सुभाष ने सहजता से उत्तर दिया वहीं जितेन्द्र को जैसे साँप सूंघ गया और फोन रख दिया। श्री जितेंद्र का फोन काटना इस बात की गवाही है कि वह याा तो सच का सामना नहीं करना चाहते थे, या उनके दाल में कुछ काला है, क्योंकि जिस समाचार पत्र में वे पत्रकार हैं वहां वर्षों पहले दर्जनों पत्रकार साथियों को दूध के मक्खी की तरह निकाला कर उन्हें पैदल कर दिया गया। श्री जितेंद्र क्लाउन टाइम्स से बात करके कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं। उन्हें पता है यदि यहां से निकाले गए तो उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। अब उनके पास रोजी – रोटी के लिए उक्त अखबार में किसी तरह बने रहना उनकी मजबूरी है, साथ ही अपने वजूद को बचाए रखने के लिए काशी पत्रकार संघ की राजनीति में गैर पत्रकारों के भरोसे बने रहना उनके निजी स्वार्थ से जुड़ा मामला है।

बताते चले काशी पत्रकार संघ में किसी भी बड़े समाचार पत्र का पत्रकार साथी चुनाव नहीं लड़ता। क्योंकि उसे अपने संस्थान में काम के बोझ से फुर्सत नहीं है और संस्थान प्रबंधन भी इस बात की इजाजत नहीं देता कि वो चुनाव लड़े। संघ की राजनीति में खास कर अमर उजाला, हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा जैसे बड़े अखबार के पत्रकार साथी काशी पत्रकार संघ की राजनीति से दूर रहते हैं। पत्रकार संघ की ओछी राजनीति के चलते वाराणसी के सबसे बड़े समाचार पत्र दैनिक जागरण, आई नेक्स्ट के पत्रकार साथियों ने वर्षों पहले इस्तीफा देकर यह साबित कर दिया कि उनकी पहचान पत्रकार संघ से नहीं है, बल्कि वे कलम के सिपाही हैं जहां रहेंगे वहीं चमकेंगे। अब वही पत्रकार, पत्रकार संघ के चुनाव में हिस्सा लेते हैं या तो वह समाचार पत्र से निकाले गए हो या तो उनका रिटायरमेंट हो गया हो अथवा वह आज, जनसंदेश जैसे सामान्य समाचार पत्र के कर्मचारी हों। जहां काम के लिए प्रबंधन का कोई दबाव नहीं है। कुल मिलाकर वह पत्रकार स्वतंत्र है जो चाहे सो करें क्योंकि उन्हें उनकी मेहनत का वाजिब मेहनताना नहीं मिलता, उन्हें उतना ही मिलता है जितना वह किसी को बताने में भी अपनी बेइज्जती महसूस करते हैं।

इसबार के चुनाव में काशी पत्रकार संघ के वर्तमान अध्यक्ष सुभाष सिंह जिन पत्रकार साथियों के समर्थन से अध्यक्ष चुने गए हैं, उन्हीं लोगों के कड़े ऐतराज के चलते गैर पत्रकारों को किसी भी कीमत पर संघ की सदस्यता देने के पक्ष में नहीं हैं। इसबार के हार का सामना करने वाले निवर्तमान अध्यक्ष ने तो बाकायदा साधारण सभा में अपने कार्यालय के दौरान लोगों से विञापन के नाम पर वसूले गए लाखों रुपए का जब हिसाब नहीं दे पाये तो अमर उजाला पत्रकार अजय राय सहित अन्य पत्रकारों ने इसका कड़ा विरोध किया तो वे साधारण सभा में यह कहते हुए माफी मांगे कि मैं इसका हिसाब नहीं दे सकता, हमें माफ कीजिए। पत्रकारों के नाम पर पत्रकारपुरम में करोड़ों की संपत्ति लाखों में पाने वाले बीबी यादव को जब पत्रकार संघ के शीर्ष पद पर की जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने पत्रकारों के नाम पर महज कुछ लाख में मिली जमीन को लगभग 85 लाख में बेचकर यह साबित कर दिया कि कि उनके लिए नैतिकता का कोई तकाजा नहीं है।

पत्रकार संघ की गंदी राजनीति चलते दर्जनों वरिष्ठ पत्रकारों को संघ की सदस्यता से वंचित किया है, इसी का परिणाम है कि वाराणसी प्रेस क्लब जैसा मजबूत संगठन मजबूती से खड़ा हो गया है और उपजा के कार्यक्रम में कार्यक्रम में स्वयं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नायिक ने हिस्सा लेना इसबात की गवाही है कि अब संघ के भरोसे नहीं बल्कि पत्रकारों के भरोसे कर संघ का वजूद है।

रिपोर्ट- सर्वेश कुमार यादव 

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