अभिमान भगवत प्राप्ति में बाधक- आचार्य पं.मनीष चन्द्र त्रिपाठी

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सुल्तानपुर(ब्यूरो)- मनुष्य अपने जीवनकाल में धनार्जन के बाद अर्जित धन से कोई भी निर्माण कार्य ,बच्चों की उच्च शिक्षा आदि कार्यो का श्रेय स्वयं लेता है और वहीँ बिगड़े कार्यो एवं बिपत्तियो के समय वह ईश्वर को दोष दिया करता है |मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक कार्य ईश्वर को समर्पित करते हुए जीवन पथ पर आगे बढ़ना चाहिए| मनुष्य के जीवन में अभिमान ही भगवत प्राप्ति में बाधक सिद्ध होता है। मनुष्य को कभी भी अपने धन, पद, विद्वता, योग्यता पर अभिमान नही करना चाहिए।

उक्त उद्गार गोपालपुर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन यह भगवत भाव सुलतानपुर जनपद के कथावाचक पं.मनीष चन्द्र त्रिपाठी ने भक्तों के बीच व्यक्त किया। कथा वाचक ने दिवा कालीन वेला में श्रोताओं को पूतना उद्धार, नामकरण संस्कार, माखन चोरी लीला, कलियानाग का उद्धार, चीर हरण लीला के साथ ही गोवर्धन लीला का विस्तृत प्रसंग श्रोताओं को सुनाया। कथावाचक ने कालिया उद्धार के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया की कर्म रूपी यमुना नदी में कालिया रूपी अभिमान छिपा हुआ था। कालिया रूपी अभिमान के कारण कर्म रूपी यमुना नदी का जल दूषित हो गया था।भगवान कर्म रूपी यमुना नदी से कालिया रूपी अभिमान को निष्कासित करते हैं।

कथावाचक ने बताया की जिस व्यक्ति के अंदर अभिमान घर बना लेता है। उससे उस व्यक्ति का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान होना शुरू हो जाता है। इस बीच भजन छोटी-छोटी गैय्या, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटो से मेरो मदन गोपाल एवं ‘तांडव गति मुण्डन पर नाचत गिरधारी’ पर श्रोता आनन्दित हो भक्ति भाव से झूमने लगे। पंडित सौरभ शुक्ल ने मुख्य यजमान दयाशंकर पाठक, विद्या पाठक से व्यास पीठ की पूजा करायी। इस मौके पर राजेश शुक्ल, नन्द कुमार शुक्ल, ओ.पी. चौधरी, लालजी तिवारी, पप्पू शुक्ल, संजय पाण्डेय, राम सुभावन पाण्डेय विकास सोनी, बाबूराम यादव, अभयराज वर्मा, राजेन्द्र सहित श्रोता मौजूद रहे।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा

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