फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहा प्रधानाध्यापक बर्खास्त

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रायबरेली (ब्यूरो) फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे परिषदीय विद्यालय के प्रधानाध्यापक की सेवायें समाप्त कर दी गयी है। लगभग एक माह पहले जारी सेवा समाप्ति का यह आदेश अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचा है। जिससे उनमें अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के खेल निराले हैं। जिले के ऊचाहार तहसील के प्राथमिक विद्यालय पूरे झाउ के प्रधानाध्यापक लोकेंद्र प्रताप सिंह द्वारा नौकरी के दौरान हाईस्कूल का अवैध अंकपत्र लगाकर नौकरी की जा रही थी। जिसकी शिकायत के बाद एडी बेसिक महेंद्र सिंह राणा ने जांच कराई थी। इस जांच में लोकेंद्र प्रताप सिंह दोषी पाये गये थे। जिसके बाद उन्होंने 26 जुलाई 2016 को बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस निरंजन को दोषी अध्यापक को सेवा मुक्त करने के निर्देश दिये थे। बावजूद इसके बेसिक शिक्षा अधिकारी इस प्रकरण को लगातार टालते रहे। अंत में जिलाधिकारी के निर्देश के बाद उन्होंने लोकेंद्र प्रताप सिंह को नोटिस जारी कर 03 मई 2017 को अपना पक्ष रखने के लिये बुलाया। उनके हाजिर न होने पर अंतोगत्वा 25 मई 2017 को कार्यालय पत्रांक संख्या 1945-52 द्वारा उनकी सेवा समाप्त कर रजिस्टर डाक से भेज दी। जिसे प्रभावित द्वारा रिसीव कर लेना बताया जा रहा है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा इसकी सूचना भी जिलाधिकारी को दे दी गयी है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इस आदेश की प्रतिलिपि खण्ड शिक्षा अधिकारी ऊचाहार और वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा को अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गयी है। जिससे इन अधिकारियों में यह असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि संबंधित शिक्षक के वेतन प्रकरण का क्या निस्तारण किया जाये।

रिपोर्ट – राजेश यादव

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