राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक प्राथमिकताएं

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anil singh CFO pic. एक देश के तौर पर हम खेल, शिक्षा, खोज, विकास, नियमन, अध्यात्म सुरक्षा,  न्याय, अर्थ और अन्य कई क्षेत्रों में ख्याति पाने की बहुत सारी आकांक्षाएं रखते  हैं|

हम सब इस बात को जानते हैं की विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है एक  सफलता से दूसरी और दूसरी से तीसरी…….

लेकिन इस सफ़र को और अधिक संतोषजनक और सफल बनाने के लिए हमें  आज से ही विकास के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की ज़रूरत है I हमारी सूचना  व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा (रेडिओ, टेलीविज़न, इन्टरनेट, मोबाइल, न्यूज़ पेपर) किसी न किसी तरह किसी व्यक्ति विशेष, नेता, अभिनेता, अधिकारी समाज और अंततोगत्वा देश के विषय में नकारात्मक सूचनाओं से भरा पड़ा है | यह चलन हमें एक असंतुष्ट, निरर्थक, चिंतित समाज और राष्ट्र की ओर अग्रसर करता है I

इस तरह की नकारात्मकता, प्रदर्शन में बाधा डालती है, हमें अपने देश की आकांक्षाओं को एक सुस्पष्ट तरीके से प्राथमिकता देनी होगी और कुछ लक्ष्य निर्धारित करने होंगे जैसे 2025 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी, प्रति वर्ष रेप, मर्डर, चोरी और घूस जैसे करीब 50,000 आपराधिक मामलों की कमी, ओलंपिक्स में कम से कम 50 मेडल, 2025 तक स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार, निर्माण, उद्योग और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में कम से कम 1 लाख पेटेंट्स |

हमें आध्यात्मवाद के उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास भी करना होगा जैसे 2025 तक स्कूल और संस्थानों की तरह ही उपासना (इबादत ) के लिए 1 लाख सार्वजनिक स्थान | हमें समझना होगा की न्यायालय के सामने आज भी बहुत से मामले विचाराधीन हैं | अगर हम इन बड़े लक्ष्यों को पाने की कोशिश करते हैं तो स्वच्छ जीवन, हरियाली पूर्ण जीवन, स्वस्थ जीवन, आतंकवाद में कमी, सीमा विवाद पर समाधान जैसे मुद्दों पर आसानी से सफलता पाई जा सकती है |

इन सभी उद्देश्यों को देश के नागरिकों और संस्थानों के सामने सुस्पष्ट रूप में रखने और समय – समय पर सार्वजनिक सूचना तथा अन्य माध्यमों से लोगों को याद दिलाते रहने की ज़रूरत है, इन उद्देश्यों के प्रति जागरूकता हमारे बहुमूल्य संसाधनों जैसे बुद्धजीवी जनशक्ति, भूमि, मशीनरी और सॉफ्टवेयर मॉनिटरिंग प्रणाली के बेहतर निर्धारण को संभव करेगी, इस मार्ग के अनुसरण से हम एक संतुष्ट राष्ट्र, संतुष्ट समाज और संतुष्ट व्यक्ति के लक्ष्य को सुनिश्चित कर सकेंगे, इस तरह से ही स्वच्छ सोच, स्वच्छ बोल और स्वच्छ जीवन वाला एक देश अस्तित्व में आ सकेगा |

 

अनिल सिंह

CFO बी. आर. ग्रुप

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