मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के गिरफ्तारी की पीयूसीएल ने की निंदा

बलिया (ब्यूरो) लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसलएल) ने तीन जुलाई को प्रेस क्लब लखनऊ में पत्रकार वार्ता के लिए पहुंचे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। संगठन ने उप्र सरकार की इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा खतरा बताया है।

संगठन की आपात बैठक में वक्ताओं ने कहा कि गुजरात में दलितों की झांसी में गिरफ्तारी को लेकर प्रेस क्लब लखनऊ में पत्रकार वार्ता आयोजित थी। सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ता अवकाश प्राप्त आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी, लखनऊ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. रमेश दीक्षित, रामकुमार, आशीष अवस्थी, पीएस कुरील जब प्रेसवार्ता करने पहुंचे तो वहां कई पुलिस अधिकारी भारी फोर्स के साथ मौजूद थे।

पुलिस अधिकारियों ने इन लोगों को यह कहते हुए हिरासत में ले लिया कि ये लोग योगी सरकार के खिलाफ जुलूस निकालने वाले है और इससे शांति भंग की आशंका है। संगठन ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए सदमाकारी बताते हुए कहा कि देश में बोलने की आजादी खतरे में है। यदि इस तरह की कार्रवाईयों का मुखर विरोध नहीं हुआ तो निरंकुश सरकारें पुलिस के बल पर मनुष्य की आजादी का गला घोंटने पर आमादा हो जायेगी। बैठक में एडवोकेट रणजीत सिंह, डॉ. अखिलेश सिनहा, सूर्यप्रकाश सिंह, देवेन्द्र सिंह, असगर अली, पंकज राय, ज्योति स्वरूप पाण्डेय, शैलेश धुसिया, उदय नारायण सिंह, डॉ. हरिमोहन, अरूण सिंह, बृजेश राय आदि उपस्थित रहे।

 

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