थाली से दाल गायब, सब्जी लापता, क्या यही होते हैं ‘अच्छे दिन’ ?

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अच्छे दिनों का दम भरने वाली मोदी सरकार महंगाई के मुद्दे पर बुरी तरह फंसती नज़र आ रही है | महंगाई इतनी बढ़ रही है कि आम आदमी का जीवन मुश्किल होता जा रहा है | दैनिक जीवन की चीज़ें दिन प्रतिदिन महँगी होती जा रही है खासकर महंगाई का सबसे अधिक प्रभाव खाद्य सामग्री में देखने को मिल रहा है | पिछले दो सालों में अरहर के दाम में दोगुनी की बढ़ोत्तरी हो गयी है |

इसके अलावां सब्जियों ने भी आम आदमी को रहत की सांस नहीं लेने दी है, देश की राजधानी में टमाटर इन दिनों 60/kg बिक रहा है तो हर घर की शान आलू भी 25/kg का आंकड़ा पार कर गया है | जो प्याज पिछले महीने तक आसानी से थाली में आ रहा था वही प्याज अब रुलाने लगा है |

लगातार बढ़ते इन दामों ने सरकार को हिला कर रख दिया है, बैठक पर बैठक हो रही है पर महंगाई में मुद्दे पर सरकार बेबस सी नज़र आ रही है | इस तरह के हालात देखकर आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है या तो सरकार को पहले से स्थिति का पूर्वानुमान नहीं था या फिर साब कुछ जानते हुए भी सरकार ने तत्परता नहीं दिखाई कारण कोई भी हो पर इसका असर तो आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है |

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 5 फीसदी रखने का सरकार का दवा झूठा होता दिख रहा है, वर्तमान समय में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई 6 फीसदी पर पहुँच गयी है | सरकार का दो साल पूरे होने का जश्न किस आधार पर था यह अभी भी सवाल बना हुआ है |

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