उपेक्षा के मामले में पुरोला सीट सबसे अव्वल

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uttarakhand purola
उत्तरकाशी : उत्तराखंड की विधानसभा सीटों में पुरोला भले ही पहले पायदान पर हो, लेकिन यह उपेक्षा के मामले में भी अव्वल है। राज्य गठन के बाद से आरक्षित इस विस क्षेत्र के दर्द को इसी से समझा जा सकता है कि सियासी दलों के कोरे आश्वासनों से आजिज आ चुके मोरी ब्लाक के 68 गांवों के लोगों को खुद अपना प्रत्याशी मैदान में उतारना पड़ा है।

चुनावी दंगल में उतरे भाजपा कांग्रेस सहित अन्य प्रत्याशी-

इस चुनौती ने चुनावी दंगल में उतरे भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य प्रत्याशियों को मुश्किल में डाला हुआ है। यही नहीं, क्षेत्रीय जनता पुरोला जिले के साथ ही सड़क, बिजली जैसे मुद्दों पर प्रत्याशियों से सवाल भी कर रही है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के मद्देनजर डामटा से लेकर हिमाचल की सीमा अराकोट तक फैली इस सीट पर वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 67025 है।

भाजपा ने सिटिंग विधायक मालचंद को मैदान में उतारा-

राज्य गठन के बाद अभी तक यह सीट दो बार भाजपा और एक बार कांग्रेस के पाले में रही। भाजपा ने यहां सिटिंग विधायक मालचंद को फिर से मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस ने पिछले चुनाव में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े पूर्व विधायक राजकुमार पर दांव खेला है। दोनों दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती मोरी एकता मंच की ओर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतारे गए दुर्गेश्वर लाल ने खड़ी की है।

विधानसभा के 50 गांवों तक सड़क सुविधा-

ऐसे में यहां मुकाबला दिलचस्प रहने के आसार हैं। मुद्दों की बात करें तो पुरोला जिले का गठन, विधानसभा के 50 गांवों तक सड़क सुविधा, 40 गांवों में बिजली, नौगांव पुरोला में कृषि विज्ञान केंद्र के साथ ही स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़े सवाल जनता की जुबां पर है। ये मुद्दे राष्ट्रीय दलों के भाषणों से गायब हैं। ऐसे में उन्हें क्षेत्र के पिछड़ेपन से जुड़े जनता के सवालों से भी जूझना पड़ रहा है |

रिपोर्ट – शादाब

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