रायबरेली एम्स की ओपीडी में दवाओं का टोटा, मरीजों के हाथ लग रही सिर्फ मायूसी

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रायबरेली (ब्यूरो) –  सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली मैं खुले (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) की ओपीडी में बड़े पैमाने पर मरीज रोज रजिस्ट्रेशन कराने आते हैंl दूर दराज से आए हुए लोग सारा दिन का समय निकालकर रजिस्ट्रेशन कराते हैंl और डॉक्टरों को दिखाते हैं डॉक्टर साहब द्वारा मरीज को देखकर दवाई लिखी जाती हैl जो एम्स की ओपीडी के दवा काउंटर में नहीं होतीl दूर दराज से आए लोगों को बड़ा झटका लगता हैl ओपीडी की दवा काउंटर में बैठे डॉक्टरों से पूछा जाता है तो डॉक्टर साहब द्वारा बताया जाता है कि यह जो दवा लिखी गई है वह मौजूद नहीं हैl आप इस दवा को बाहर ले लोl वही एम्स परिसर के अंदर मौजूद दलालों के द्वारा मरीजों से अपने निजी मेडिकल स्टोर पर 10% की दवाओं में छूट की बात कह कर भेजा जाता हैl वंश मेडिकल स्टोर के द्वारा लड़कों से एम्स परिसर में घूम-घूमकर मेडिकल स्टोर के कार्ड मरीजों में बांट कर उन्हें वहीं से दवा खरीदने को कहा जाताl

सोनिया गांधी के संसदीय इलाके रायबरेली जो की बीवी आई पी की श्रेणी में आता है का क्या हाल है। अभी सिर्फ एम्स की ओपीडी ही चालू हुई है कि दवा माफिया किस तरह से सक्रिय हो गए। गरीब जनता यहां आती है कि उसका बेहतर इलाज हो सके लेकिन यहां आकर उसे सिर्फ निराशा ही मिलती हैl उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से दवा माफिया बड़े पैमाने पर डॉक्टरों से सेटिंग कर लाखों रुपए रोज कमा रहे हैंl जिसे देखने वाले जिम्मेदार अधिकारी देखकर भी अनदेखा कर देते हैंl त्रिवेदी मेडिकल स्टोर में एम्स की समस्त प्रकार की दवाई मिल जाती है। वही जो जांच एम्स में नहीं है वह बाहर के लिए लिख दी जाती है। मजबूरी में मरता क्या न करता जांचें मनमाने रेट में कराई जाती है। यही नहीं अगर मरीज को यहां दिखाने से कोई फायदा नहीं होता है और वह लखनऊ जाता है तो यहां रायबरेली की जांचे लखनऊ में मान्य नहीं होती है। ओपीडी में बड़े पैमाने पर दवाओं के नाम पर दवा माफियाओं द्वारा गरीब जनता और मरीजों का शोषण किया जा रहा है जिसे देखने वाला कोई नहीं हैl

रिपोर्ट – प्रशांत त्रिपाठी

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