रचनाकारों की रचनाएं सुन भाव विभोर हुए श्रोता

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शिकारगंज/चन्दौली (ब्यूरो)- स्थानीय क्षेत्र के ग्राम नौड़ीहां मे विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमे कवियों ने अपनी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को पूरी रात झूमने पर विवश कर दिया, कार्यक्रम का शुभारम्भ मनोज दुबे “मधुर” की सरस्वती वन्दना ‘हे बेद गर्भा, हे शब्द जननी सुरलय ताल से सजाने वाली’से हुआ।

उसके बाद बन्धू पाल ‘बन्धु’ने अपनी हास्य व्यंग की कविता सुना कर सबको हंसने पर विवश कर दिया, उमेश द्विवेदी ने मांगला खूनी तराना आशिकी ना गाइए सुनाकर लोगो को भाव विभोर कर दिया, सलीम चन्दौली ने मैं नवाज माँ के दुपट्टे पर पढ़ के निकला हूं सुनाया, श्रीमती रंजना राय (वाराणसी) ने परिन्दा खुद चले आते, बुलाने हम नहीं जाते इसके अलावा छन्द मुक्तक सुनाकर महफिल मे चार चाँद लगा दिया |

साहिल मीरजापुरी ने कहा कि चाहे कुछ भी हो अपनी पहचान बनाए रखना,विभा सिंह ने सुनाया की डोली संग जाऊँ न कँहार संग जाऊंगी,सुरेन्द्र मिश्र “अंकुर”ने अब पहिले वाला गाँव कहां बा सुना कर बाहवाही लूटी,रेयाज मीरजापुरी ने गमों की दौर मे पाना शकूँ मुश्किल सा लगता है, मनोज दूबे “मधुर”आदमी तन से नही मन से भी बौना हो रहा सुना कर कार्यक्रम को एक नई दिशा दिया,इसके अलावा भकाभक मीरजापुरी नागेश शांडिल्य (वाराणसी),शिवदास अनपढ़,भुलक्कड़ (बनारसी),रंग बहादुर सिंह “रंग”,रामजी मौर्य”सरस” ने भी काव्य पाठ किया,चंड़ीगढ़ से पधारे कवि मुन्ना राम ने भी काव्य पाठ किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता रामजी मौर्य”सरस”तथा संचालन प्रकाश मीरजापुरी ने किया,अन्त में आयोजक प्रेम प्रकाश ने सभी रचनाकारों को अंग वस्त्रम् व स्मृति चिन्ह दे कर सम्मानित किया।

रिपोर्ट- ठाकुर मिथिलेश सिंह
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