मिल सकता है राहुल गांधी को गिनीज बुक ऑफ़ द वर्ल्ड रिकॉर्ड

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भोपाल- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के यूआईटी कॉलेज के एक इंजीनियरिंग के छात्र ने कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पिछले 5 सालों के अंदर हुए 27 चुनाव में हार को एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बताया है।

यूआईटी के इंजीनियरिंग छात्र विशाल दीवान ने बताया कि राहुल गांधी ने पिछले 5 सालों में बतौर कांग्रेस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जहां-जहां भी प्रचार किया है हर उस राज्य में कांग्रेस पार्टी ने चुनाव हारा है, इसलिए मिस्टर दीवान ने कहा है की राहुल गांधी बतौर लीडर दुनिया में सबसे अधिक चुनाव हारने वाले नेता है। यही कारण है कि विशाल दीवान ने गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड देने वाली संस्था को एक पत्र लिखकर उनका नाम (राहुल गांधी का) गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की बात कही है।

क्या कहते हैं विशाल दीवान-
RSS कार्यकर्ता विशाल दीवान का कहना है कि पिछले 5 सालों में राहुल गांधी ने जहां-जहां भी कांग्रेस का प्रचार किया है, हर उस प्रदेश में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। यही कारण है कि विशाल ने गिनीज बुक एडमिनिस्ट्रेशन को एक पत्र लिखा है और इतना ही नहीं उसने इनरोलमेंट फीस के रूप में 5 डॉलर भी चुका दिए हैं। मजे की बात तो यह है कि गिनिज बुक एडमिन्सट्रेशन ने विशाल दीवान को रिप्लाई करते हुए लिखा है कि उनका लेटर एक्सेप्ट कर लिया गया है। हालाँकि की गिनीज बुक एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि एप्लीकेशन अप्रूव हुई है या नहीं। गौरतलब है कि गिनीज बुक इसके लिए तकरीबन 12 हफ्तों का समय लेता है, हलाकि विशाल दीवान को इस बात की पूरी उम्मीद है कि उन्होंने जो भी दावा किया है उसे गिनीज बुक अवश्य मानेगा।

किन किन राज्यों में हारे हैं चुनाव-
गौरतलब है कि बतौर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2012 से कांग्रेस का जमकर चुनाव प्रचार करना प्रारंभ किया था। जबकि 2012 में ही उन्हें पहली हार का खट्टा स्वाद भी चखना पड़ा था। राहुल गांधी को वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और गुजरात में तथा 2013 में त्रिपुरा, नागालैंड, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हार का जबरदस्त सामना करना पड़ा था।

इसी प्रकार राहुल गांधी की हार का सिलसिला लगातार जारी रहा और वर्ष 2014 में वह पूरा का पूरा लोकसभा चुनाव हार गए और कांग्रेस को लोकसभा में क्षेत्रीय पार्टियों के बराबर भी सीटे ना हासिल हो सकी। 2014 में लोकसभा चुनाव के अलावा राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव भी हार गई।

2015 में राहुल गांधी ने दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का नेतृत्व किया और उन्होंने कांग्रेस को सत्ता में पुनः वापस लाने के लिए जमकर मेहनत की लेकिन दुर्भाग्य से यहां भी कांग्रेस को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। गौरतलब है कि दिल्ली में हुए 2015 चुनाव में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था।

उसके बाद 2016 में राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने एक एक करके वेस्ट बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु के सभी चुनाव हार गए।

और अब हम इस समय हाल ही में संपन्न हुए 2017 विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड दोनों ही राज्यों में बुरी तरह से हार गई जबकि मणिपुर, गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर तो उभरी लेकिन वहां भी सरकार बनाने में असमर्थ रही और नंबर दो की पार्टी होने के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी ने सफलतापूर्वक यहाँ पर सरकार बना लिया।

हम राहुल गांधी की हार की बात कर रहे हैं तो यहां राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की जीत की भी बात करना अति आवश्यक है और अब यदि राहुल गांधी के कांग्रेस उपाध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने किन-किन राज्यों में जीत दर्ज की है। उसकी बात करें तो पिछले 5 सालों में कांग्रेस को मात्र 9 बार ही जीत का स्वाद चखने का मौका मिला है। जिन चुनाव में कांग्रेस ने जीत का मुख देखा है वे कुछ इस प्रकार है, वर्ष 2012 में कांग्रेस ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव को जीता तथा 2013 में कांग्रेस ने कर्नाटक, मिजोरम तथा मेघालय में भी जीत दर्ज की 2014 में कांग्रेस कोई भी चुनाव ना जीत सकी और यह वर्ष कांग्रेस के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा है।

2015 में बिहार में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने महागठबंधन बनाया और इसमें कभी कांग्रेस के चिर प्रतिद्वंदी रहे NDA के समर्थक नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महा गठबंधन ने जीत दर्ज की। बिहार की जीत से एक बार को ऐसा लग रहा था कि शायद अब महागठबंधन प्रभावी हो और भारतीय जनता पार्टी तथा उसके घटक दलों को सत्ता में आने से रोक सके लेकिन महागठबंधन का जादू ज्यादा दिन तक ना चल सका। हालांकि 2016 में हुए पुदुचेरी के चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की लेकिन 2016 में कांग्रेस को एक बार फिर से असम, वेस्ट बंगाल, केरल तथा तमिलनाडु में हार का भी सामना करना पड़ा 2017 में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ पंजाब में ही सरकार बनाने में सफल रही है।

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