परियोजनाओं को पूरा करने में रेलवे की तेज रफ्तार |

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xSureshPrabhu

रेल मंत्रालय ने रेल-बजट 2015-16 में 77 लाइनों का दोहरीकरण, चार लाइनों और एक गेज परिवर्तन की परियोजनाओं को शामिल किया था। ये परियोजनाएं ज्यादा सामान और सवारियों को ढोने के उद्देश्य के लिए हैं। इन परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करना प्राथमिकता है। इन्हें जल्दी पूरा करने से ही इन परियोजनाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा। रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु के निर्देशन में इन परियोजनाओं के तेजी से पूरा करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

  1. अब तक बजट में रेलवे परियोजनाओं को शामिल कर इसे सैद्धांतिक मंजूरी (आईपीए) के लिए नीति आयोग को भेजा जाता था जो रेलवे बोर्ड की विस्तारित बैठक करता था। इसके बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी (सीसीईए) की मंजूरी के लिए भेजा जाता था। एक बार कैबिनेट की मंजूरी मिल जाने के बाद रेलवे अंतिम रूप से स्थान के सर्वेक्षण और परियोजना का विस्तृत आकलन करता था। विस्तृत आकलन के बाद से ही अनुमानित परियोजना पर होने वाला खर्च निकाला जाता था और इसके बाद राशि आवंटित होती थी। इस प्रक्रिया में दो-तीन साल लग जाते थे। इसका मतलब यह है परियोजना को रेल बजट में शामिल करने के दो साल बाद टेंडर निकाला जाता था।
  2. इसमें लगने वाले इस समय को कम करने के लिए मंत्रालय ने परियोजना को बजट में शामिल करने के बाद  स्थान का अंतिम सर्वेक्षण का जिम्मा  जोनल रेलवे को दे दिया है। सर्वेक्षण के बाद रेलवे बोर्ड को लागत के साथ विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) भेजने की जिम्मेदारी भी जोनल रेलवे को दी गई। इस साल दोहरीकरण की 77 परियोजनाओं में 73 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। ये परियोजनाएं रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी हैं।
  3. रेलवे मंत्रालय में डीपीआर की जांच और निगरानी में संबंधित अधिकारियों की ओर से तेजी लाई गई है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई है। अलग-अलग अधिकारी की ओर से निगरानी के बजाय अधिकारियों की एक कमेटी की ओर से निगरानी की व्यवस्था को अपनाया गया है।
  4. परियोजनाएं रेलवे बोर्ड की ओर से डीपीआर की जांच के बाद नीति आयोग की सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजी जा रही हैं। अब तक नीति आयोग को 15 आईपीए मिल चुकी हैं। इन 15 आईपीए में से 4 परियोजनाओं की लागत 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इन्हें सीसीईए की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।
  5. आईपीए प्राप्त होने के बाद जोनल रेलवे को परियोजनाओं के लिए तुरंत टेंडर निकालने को कहा गया है। हालांकि परियोजना के लिए जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही वित्तीय प्रतिबद्धता जताने को कहा गया है।
  6. परियोजनाओं में होने वाली देरी खत्म करने के लिए रेलवे को अब नीति आयोग को डीपीआर भेजने के तुरंत बाद  ही टेंडर निकालने के लिए कहा जा रहा है। इसके लिए नीति आयोग की मंजूरी का इंतजार नहीं करने के लिए कहा जा रहा है।
  7. पिंक बुक में परियोजना शामिल होने के बाद टेंडर आमंत्रित करने की अवधि दो साल से घट कर छह से नौ महीने हो गई है।
  8. इसके अलावा जोनल रेलवे को विस्तृत आकलनों को मंजूरी देने का भी अधिकार दिया गया है। मंजूरी मिलने में देरी को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
  9. इस तरह के सभी टेंडर स्वीकार करने का अधिकार जोनल रेलवे को दे दिया गया है। इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी कम होती दिख रही है।

Source – PIB

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