रेलवे स्टेशन अब भी बदहाल, कई बार हो चुके हैं आंदोलन

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दलसिंहसराय(समस्तीपुर): भारतीय रेल यात्रियो को मुस्कान के साथ यात्रा करने का स्लोगन देते हुए आपकी यात्रा सुखद हो की बात कहती है. लेकिन यह स्लोगन दलसिंहसराय रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए छलावा साबित हो रहा है. क्योंकि यात्रा करने वाले यात्रिओं को एक नंबर प्लेटफार्म से दो नंबर प्लेटफार्म पर जाने के लिए प्लेटफार्म नंबर एक के अंतिम छोर पर बने लकड़ी के फुटओवरब्रीज का सहारा लेना पड़ता है |

प्लेटफार्म की जगह छोटे यात्री शेड के रहनें से यात्रियो को धुप, वर्षा एवं जाड़े के मौसम में ओस के बूंदों का सामना करना पड़ता है. वहीं दो नंबर प्लेटफ़ॉर्म पर शौचालय नहीं रहने के कारण एक नंबर प्लेटफ़ॉर्म पर यात्रियो को आना पड़ता है. स्टेशन पर मालगाड़ी लगी रहने के कारण लोग उसके नीचे से जान जोखिम में डालकर आने-जाने का काम करते है, ये चंद उदाहरण है दलसिंहसराय रेलवे स्टेशन के रख-रखाव एवं यात्रियो को दी जाने वाली सुविधाओ का. इसके अलावा स्टेशन पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, प्रतीक्षालय आदि की सुविधा नहीं रहने से यात्रियों को काफी परेशाानियां उठानी पड़ती है. लेकिन यात्री जाएं तो जाएं कहां जाए. वे इसी स्थिति में इस स्टेशन से यात्रा करने को मजबूर होते हैं. ऐसा नहीं की इस मुद्दक को लेकर स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन से जुड़ें लोगों द्वारा आंदोलन नहीं किया गया हो. कई बार आंदोलन हुआ भी लेकिन सभी को रेल प्रशासन द्वारा सिर्फ आश्वासन की घुट्टी ही पिलाई गई है |

क्या कहते हैं आंदोलन करने वाले
सामाजिक संगठन आजाद क्रांति सेवा दल के संस्थापक अनिल सिंह पीपी का कहना है कि हमारे नेतृत्व में स्टेशन की समस्या को लेकर 2004 में आमरण अनशन किया गया था, जो तीन दिनों बाद तत्कालीन डीसीएम, डीसीआइ द्वारा समस्याओं के निराकरण हेतु लिखित समझौता के उपरांत समाप्त किया गया था, जो अब तक छलावा साबित हो रहा है. हमलोग एक बार फिर आंदोलन करने का मन बना रहें हैं. अनुमंलीय बुद्धिजीवी विचार मंच के अध्यक्ष अवकाशप्राप्त न्यायाधीश नागेन्द्रनाथ चौधरी का कहना फ़रवरी 2012में एक दिवसीय अनशन कार्यक्रम कई समस्या को लेकर किया गया था, रेल अधिकारियो द्वारा आश्वासन दिया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नही हुई है |

क्या कहतें हैं स्टेशन अधीक्षक
स्टेशन अधीक्षक सुनील कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि इस समस्या के सम्बन्ध में हमारे रेल के वरीय अधिकारी ही बता पायेंगें |

आइए डालते हैं स्टेशन के इतिहास पर एक नजर
दलसिंहसराय को कृषि व्यापार एवं उधोगिक क्षेत्र में भारत में अव्वल रहने के कारण दलसिंहसराय में दूसरा तथा बिहार में 1914 ई. में पहला रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया गया था. प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्रिओं की संख्या एवं राजस्व पर रू प्रतिदिन 3500 से अधिक यात्री टिकट कटा कर यात्रा करते हैं |

रिपोर्ट – रजनीश कुमार

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