सस्ते आवासों के लिए राजस्थान निजी निवेश करने वाला पहला राज्य बना |

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vasundhra raje

राजस्थान सस्ते घरों के निर्माण को प्रोत्साहन देने वाला पहला राज्य बन गया है जिसके लिए उसने निजी क्षेत्रों के साथ 5400 करोड़ रूपये के निवेश के लिए चार सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किये हैं। यह सहमति पत्र पूर्व में किये गये 27 सहमति पत्रों का अंग हैं और इस तरह आवासीय औऱ शहरी विकास परियोजनाओं में कुल 12,478 करोड़ रूपये के निवेश से संबंधित हैं। इस आशय के सहमति पत्रों पर आज जयपुर में शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू और राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गये। इनमें आवासीय परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने वाले 9,273 करोड़ रूपये के निवेश संबंधी 14 सहमति पत्र शामिल हैं।

टाटा हाउसिंग डेवलेपमेंट कंपनी लिमिटेड ने सस्ते और टाउनशिप के मिश्रित उपयोग के लिए 2000 करोड़ रूपये के निवेश की प्रतिबद्धता की है। इसका रकबा 10.12 हेक्टेयर है। इसी तरह महिमा रियल इस्टेट प्राईवेट लिमिटेड ने 1700 करोड़ रूपये के निवेश के लिए और नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन तथा विश एम्पायर ने 500-500 करोड़ रूपये के निवेश के लिए राजस्थान सरकार के साथ  सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं।

 

आवास संबंधी 14 निवेश परियोजनाओं से उम्मीद की जाती है कि इनसे 26,650 लोगों को रोजगार मिलेगा। आज 27 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद आशा की जाती है कि इनसे कुल 38,950 लोगों को रोजगार मिलेगा।

अन्य सहमति पत्र राजस्थान के विभिन्न भागों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, उद्योग और पर्यटन से संबंधित हैं।

इस अवसर पर श्री एम. वेंकैया नायडू ने राजस्थान की सराहना की कि राज्य ने नये शहरी क्षेत्र पहलों को लागू करके अग्रणी स्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए किए जाने वाले निवेश सहमति पत्रों से अन्य राज्यों को दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान ऐसा पहला राज्य है जिसने शहरी विकास मंत्रालय को अमृत कार्य योजना सौंप दी है। इस तरह वह शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट सिटी अभियान, अटल अभियान (अमृत), धरोहर अभियान और आवासीय अभियान के संबंध में चालीस शहरों को चिह्नित करने वाला पहला राज्य बन गया है।

श्री एम. वेंकेया नायडू ने कहा कि देश के शहरी भू-भाग को बदलने का चुनौतीपूर्ण कार्य है और इसके लिए शहरी क्षेत्रों में समुचित बुनियादी ढांचा तैयार करने का बड़ा काम किया जाना है। इसके तहत निवेश के भी बड़े अवसर पैदा होते हैं। मंत्री महोदय ने शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के अंतराल की चर्चा भी की। इसका ब्यौरा इस प्रकार है-

 

क्र.सं. संकेतक बुनियादी लक्ष्य राष्ट्रीय औसत
1 जल आपूर्ति का दायरा 100% 50.20%
2 प्रति व्यक्ति जल आपूर्ति 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन 69.20 लीटर प्रति दिन प्रति व्यक्ति
3 पानी के मीटर लगाने का दायरा 100% 13.30%

 

4 राजस्व विहीन जलापूर्ति का दायर (बिना खर्च लिए जल आपूर्ति) 20% 32.90%
5 जल आपूर्ति की उपलब्धता 24 घंटे 3.10 घंटे
6 जल आपूर्ति सेवा के खर्च की वसूली 100% 38.80%
7 शौचालयों का दायरा 100% 69.50%
8 सीवेज नेटर्वक सेवाओं का दायरा 100% 12.20%
9 सीवेज उपचार क्षमता 100%   5.30%
10 पानी के दुबारा इस्तेमाल किए जाने और रिसाईक्लिंग का दायरा    20%    4.00%
11 घर-घर जाकर ठोस कचरे का संकलन 100% 35.00%
12 ठोस कचरे को अलग करना 100% 10.80%
13 कचरे के प्रसंस्करण का परिमाण  80% 14.50%
14 ठोस कचरे का वैज्ञानिक निपटान 100%    9.70%
15 जल निकासी नेटवर्क का दायरा 100% 45.80%

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