राजपूताना रेजीमेंट : एक ऐसा नाम जिससे घबराता हैं समूचा पकिस्तान, जानिए क्या हैं खासियत…?

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राजपूताना रेजीमेंट : वीर भोग्या वसुंधरा, राजा रामचंद्र की जय

राजपुताना रेजीमेंट का निशान
राजपूताना रेजीमेंट का निशान

 

के नारों से उद्घोसित होने वाली यह भारत वर्ष की 240 साल पुरानी यानि की देश की सबसे पुरानी सैनिक रायफल रेजीमेंट हैं I

  • आज़ादी के बाद जब-जब दुश्मनों नें हमारे इस पवित्र देश की तरफ अपनी नज़रें तिरछी की हैं तब-तब भारत माता की सेवा में इस राजपूत रेजीमेंट के बहादुर जवानों ने अपना सर्वस्व निछावर करते हुए उच्च कोटि के युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया हैं IRajputs
  • आज़ादी से पहले भी जब भारत वर्ष में अंग्रेजों का आधिपत्य था उस समय अंग्रेजों को फ्रांसीसी सेना से मुकाबला करने में खासी मसक्कत का सामना करना पड रहा था ऐसे समय में अंग्रेजों ने राजपूतों के युद्ध कौशल और वीरता के बारे में बहुत कुछ देखा और सुना हुआ था इसीलिए फ्रांसीसी सेना का मुकाबला करने और अंग्रेजों की मदद के लिए वर्ष 1775 ई. में इस बहादुर रेजीमेंट का गठन किया गया था I
  • हमारी मातृभूमि भारत वर्ष की आज़ादी से पहले हुए दोनों विश्वयुद्धों में इस रेजीमेंट ने अंग्रेजों की तरफ से युद्ध करते हुए उत्कृष्ट सेवा, उच्च श्रेणी की वीरता का प्रदर्शन किया था I
  • राजपूत रेजीमेंट को द्वतीय विश्व युद्ध में उच्च कोटि की बहादुरी और अत्यधिक श्रेष्ठ युद्ध कौशल के लिए विक्टोरिया क्रास (ब्रिटेन का सबसे बड़ा सैनिक सम्मान) से सम्मानित किया गया था Irajrif
  • भारत माता की आज़ादी से पहले ही राजपूत रेजीमेंट (राजपूत रायफल्स) को लगभग 600 वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका था, जिसमें से एक द्वतीय विश्व युद्ध में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्राप्त किया गया विक्टोरिया क्रास भी था I
  • आज़ादी के बाद से लेकर अभी तक इस रेजीमेंट के नाम लगभग 569 से भी ज्यादा वीरता मेडल हैं I
  • आज़ादी से पहले और अब तक मेडल्स अगर हम मिला देते हैं तो एक हजार से भी ज्यादा वीरता मेडल दिए गये हैं I
  • भारत का प्रथम परमवीर चक्र भी राजपूत रेजीमेंट के हवलदार पीरु सिंह को मरणोपरांत 1948 में पकिस्तान के खिलाफ 1947 -1948 के युद्ध उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया था I

आखिर क्यों थर्राता हैं पकिस्तान और उसका एक-एक सैनिक इस रेजीमेंट का नाम सुनकर –

क्योंकि आज़ादी के बाद से हुई अब तक के सभी 4 युद्धों में पकिस्तान को सबसे ज्यादा नाकों चने चबवाया हैं इसी रेजिमेंट ने –

भारत-पकिस्तान प्रथम युद्ध – 1947-1948

  • आज़ादी के तुरंत बाद ही जब भारत से पकिस्तान अलग हुआ तो तुरंत ही पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी कबालियों के साथ मिलकर जम्मू और कश्मीर जो कि भारतीय क्षेत्र हैं वहां अतिक्रमण करने के लिए वहां कत्लेआम मचा दिया था ऐसे में तुरंत ही भारत के तत्कालीन गृहमंत्री श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सेना को इन्हें मुंहतोड़ जवाब देने के लिए जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना कर दिया था I

rajput 1947

  • 6 राजपूताना रेजीमेंट 5 नवम्बर 1947 की सुबह भयंकर सर्दी के मौसम में जम्मू-कश्मीर पहुंची I
  • जब तक राजपूताना रायफल्स जम्मू-कश्मीर पहुंची तब तक पाकिस्तानी फौज ने कबालियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर के ज्यादा से ज्यादा हिस्सों पर कब्ज़ा कर चुकी थीI
  • और तभी 5 नवम्बर 1947 को पहली बार पाकिस्तानी फौज के खिलाफ देश की इस बहादुर राजपूत रेजिमेंट ने मोर्चा खोला और तब शुरू हुआ राजपूताना रायफल्स का पाकिस्तानियों के खिलाफ ताडंव I rajput 19471
  • फलस्वरूप पाकिस्तानी सेना और कबालियों के पैर उखड गए और उन्हें युद्ध का मैदान छोड़कर भागना पड़ा I
  • इसी युद्ध के दौरान राजपूत रायफल्स के शहीद कंपनी हवालदार मेजर पीरू सिंह को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया और उनके साथी रायफल मैन ढ़ोंकल सिंह और हवलदार चूना राम को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया I
  • 1947-1948 की इस लड़ाई में राजपूत रेजीमेंट को 14 वीर चक्र भी दिए गए

 

भारत-पाकिस्तान युद्ध द्वतीय 1965

  • सितम्बर 1965 में पाकिस्तानी सेना ने अचानक एक साथ जम्मू-कश्मीर के छंभ और पंजाब दोनों जगहों पर एक साथ धावा बोल दिया I
  • और इन दोनों ही स्थानों पर पाकिस्तानी सेना के नापाक ईरादों का जवाब देने के लिए सामने खड़ी हुई थी राजपूत रेजीमेंट I1965
  • खेमकरण में 18 राजपूताना रायफल्स के जवानों ने बहुत निर्भीकता से दुश्मन का सामना किया और बहुत ही उत्कृष्ट युद्ध कौशल का परिचय दिया Ikhemkaran
  • राजपूत रायफल की इस टुकड़ी का नेत्रत्तव कर रहे ले. कर्नल रघुवीर सिंह, कर्नल सिंह की अगुवाई में राजपूत रायफल्स के जवानों ने खेमकरण की धरती को पाकिस्तानी टैंको की कब्रगाह में तब्दील कर दिया I आज भी खेमकरण में पाकिस्तानी टैंको के टुकड़े सबूत के रूप में खेमकरण में मौजूद हैं I
  • इस वीरता के लिए ले. कर्नल रघुवीर सिंह को महावीर चक्र और उनकी बहादुर बटालियन को “असल उत्तर” से सम्मानित किया गया I

 

भारत-पाकिस्तान तृतीय युद्ध 1971-

  • जैसा की समूचा विश्व जानता हैं कि 1971 में भारत पर पकिस्तान ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों छोरों से हमला कर दिया था और भारत को एक ही साथ दोनों छोरों पर पकिस्तान से युद्ध करना पड़ा था I
  • भारत के लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि दोनों ही छोरों पर पाकिस्तानी सेना के सामने भारत का गौरव हाथों में लिए भारतीय सेना की अगुवाई की थी राजपूताना रायफल्स ने I

पूर्वी छोर की लड़ाई – 3 दिसंबर की सर्दी में पकिस्तान ने भारत पर अचानक आक्रमण बोल दिया

  • और पूर्वी छोर पर पाकिस्तानी सेना का स्वागत करने के लिए सामने खडे हुए थे, मात्रभूमि की रक्षा का हजारों वर्षों पुराना गौरवमयी इतिहास ह्रदय में दबाएँ बहादुरों के वंशज यानि राजपूत रायफल्स के बहादुर जवान I paksurr surrender
  • पूर्वी पाक सीमा पर पकिस्तानी सेना का जवाब 3 दिसंबर से लगातार 7 राजपूताना रायफल्स के जवान बहुत बहादुरी के साथ दे रहे थे I
  • 9-10 दिसंबर की मियानामति की लड़ाई हुई जिसे राजपूताना रायफल्स के जवानों ने ले.कर्नल ए.एस. बरार की अगुवाई में लड़ी, एक ही दिन के अन्दर राजपूताना के जवानों ने दुश्मन खेमे में कौफ का मौहाल पैदा कर दिया, खलबली मचा दी और दुश्मन खेमे को बर्बाद करते हुए राजपूताना रेजीमेंट के जवानों ने मियनामिति पर कब्ज़ा कर लिया I
  • मियनामिति की इस लड़ाई में नायक सगुन सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया I
  • 15-16 दिसंबर की निर्णायक लड़ाई में पूर्वी छोर पर पकिस्तान के पाँव उखड गए तभी नब्बे हज़ार (90,000) से भी ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के सामने आत्म-समर्पण किया I 1971

पश्चिमी छोर की लड़ाई –

  • जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में 4, 6 और 8 राजपुताना रायफल के जवानों ने दुश्मन से लोहा लिया और 9 राजपुताना रेजीमेंट ने उसी कृष्णाघाटी में पाकिस्तानी सैनिकों को धुल चटा दिया जहाँ पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कायरता दिखाते हुए बीते मंगलवार को रात में छुप कर हमला बोला था I
  • और इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर के साथ ही साथ राज रिफ के जवान एक लड़ाई राजस्थान की सीमा पर भी लड़ रहे थे I
  • यहाँ पर लड़ाई करते हुए 17 राजपुताना रायफल्स ने पकिस्तान के मसितवारों टार पर और 2 राजपुताना रेजीमेंट ने परबत अली पर कब्ज़ा कर लिया था I
    1971 के युद्ध के समाप्ति पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा आत्म समर्पण
    1971 के युद्ध के समाप्ति पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा आत्म समर्पण

 

भारत पकिस्तान चतुर्थ युद्ध 1999 – कारगिल वार

  • वर्ष 1999 की सर्दियों में पकिस्तान ने एक बार फिर से भारत की पीठ पर खंजर घोंपा I
  • पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमा के अन्दर भारतीय सैनिकों के खाली पड़े बंकरों में सर्दियों का फायदा उठाते हुए कब्ज़ा कर लिया और जैसे ही गर्मियों में भारतीय सेना अपने बंकरों में वापस जाने लगी तब पता चला की वहां पर तो घुसपैठियों ने कब्ज़ा कर रखा हैं I
  • पाकिस्तानी सेना गोला-बारूद से पूरी तरह से लैस होकर 15000-19000 की उंचाई पर बैठ चुकी थी और वही से हर आने जाने वाले भारतीय सैनकों को मार रही थी I
  • काफी मशक्कत के बाद भारतीय सेना ने कारगिल को दुश्मनों से आज़ाद कराने का काम एक बार फिर से राजपूताना रेजीमेंट को सौंपा गया Ikargil memorykargil
  • और फिर 2 राजपुताना रायफल्स ने 15000 फुट की उंचाई पर तोरोलिंग की चोटी और 11 राजपुताना रायफल्स ने 16000 फुट की उंचाई पर प्वाईंट फाइव नाइन जीरो (.590) पर कब्ज़ा कर लिया I
  • इस लड़ाई में राजपुताना रायफल के कुछ बहादुर अफसर शहीद हो गए जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया I

अब तक राजपूत रेजीमेंट को प्राप्त चक्र –

1 परमवीर चक्र

2 अशोक चक्र

1 पद्मभूषण

11 परम विशिष्ठ सेवा मेडल

10 महावीर चक्र

8 कीर्ति चक्र

11 अति विशिस्ट सेवा मेडल

1 उत्तम सेवा मेडल

41 वीर चक्र

25 शौर्य चक्र

112 सेना मेडल

36 विशिस्ट सेवा मेडल

2 युद्ध सेवा मेडल

55 अर्जुन पुरस्कार

85 अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका हैं

 

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5 COMMENTS

  1. jai bharat jai jawan
    fuck these pakistaan in saalo ko khatam krke apna bhartiya hissa pakistaan waps chhin lena chahie
    I Love my India
    jai hind jai bharat

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