रामकथा मनुष्य को मर्यादित जीवन जीने की कला सिखाती है

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जलालपुर/जौनपुर (ब्यूरो)- क्षेत्र के बिबनमऊ ग्राम में राजेश मिश्रा के आवास पर आयोजित राम कथा के प्रथम दिन जौनपुर से पधारे रामकथा वाचक पंडित बशिष्ठनरायन उपाध्याय ने रामकथा के प्रथम सोपान का भावपूर्ण श्रवण कराके पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

रामकथा का वर्णन करते हुए  श्री उपाध्याय ने कहा कि रामकथा सबसे पहले भगवान शिव ने काकभुसुंडि जी से हंस बनकर श्रवण की और सबसे पहले माता पार्वती को उनके अनुरोध करने पर सुनाया था। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को रामकथा बहुत पसंद है और जहां पर रामकथा होती है वहां पर वह बिना बुलाए ही पहुंच जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में जो कुछ खो जाता है| वह सब रामकथा सुनने से वापस मिल जाता है। राम ऐसे हैं जो अपनी शरण में आने वाले के सारे दु:खों को समाप्त कर परमपद प्रदान कर देते हैं। भगवान की शरण में जाने वाले सुग्रीव व विभीषण को राज पद प्राप्त हो गया और अंगद भगवान के प्रिय हो गये। उन्होंने कहा कि हनुमानजी के स्थान पर होने वाली रामकथा का विशेष महत्व होता है। क्योंकि रामकथा हनुमानजी को संजीवनी के समान लगती है। रामकथा सुनने का अवसर तभी मनुष्य को मिलता है जब उसके कई जन्मों के पुण्य उदय होते हैं।

रामकथा मनुष्य को आवागमन से मुक्ति दिलाने का सुगम मार्ग होता है और रामकथा सुनने से अगले पिछले सभी जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं। रामकथा मनुष्य को मर्यादित जीवन जीने की कला सिखाती है और मनुष्य को सदमार्ग की तरफ अग्रसर करती है। बालाजी महाराज पवनसुत का बाल स्वरूप है जो भगवान राम को बहुत प्रिय है। भगवान राम के पैदा होने के बाद हनुमानजी बाल स्वरूप में भगवान शिव के साथ उनके दर्शन करने राजा दशरथ के दरबार में गए थे।

इस द्वारं श्री उपाध्याय जी ने धनुष जग्य की कथा बड़े ही मनोहारी ढंग से सुनाकर लोगो को भाव विभोर कर  दिया  इस मौके पर पंडित ब्याश पांडेय महाप्रसाद पांडेय छत्रपाल सिंह संदीप उपाध्याय हरिशंकर चौबे जय शंकर यादव सुनील मिश्रा मुन्नू पांडेय पंडित जय शंकर पांडेय समेत काफी संख्या में स्रोता मौजूद रहे|

रिपोर्ट- डॉ. अमित कुमार पाण्डेय 

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