रामचरितमानस मानसरोवर है- आचार्य शान्तनु जी महाराज

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सुलतानपुर (ब्यूरो)- जूनियर हाईस्कूल कादीपुर के मैदान पर श्री सुमंगलम् के सेवाकार्यों के सहयोगार्थ आयोजित सात दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संत आचार्य शान्तनु जी महाराज के श्री मुख से संगीतमयी श्री रामकथा का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक राजेश गौतम ने बतौर मुख्य अतिथि विधिविधान से पूजन अर्चन कर के किया। कथा के प्रथम दिवस प्रख्यात कथा वाचक विजय कौशल जी महाराज के प्रिय शिष्य आचार्य शान्तनु जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष मानस के महात्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानस यानी मानसरोवर। सरोवर तालाब एक ऐसा स्थान होता है जहा पर सभी लोग हर स्थिति परिस्थिति मे जा सकते है।मन्दिर, घर आदि स्थानों पर जाने के लिये आपको व्यवस्थित होना पड़ेगा लेकिन तालाब या सरोवर मे आप हमेशा हर स्थिति परिस्थिति मे जा सकते है।

ठीक यही स्थिति राम चरित मानस के साथ है।पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना कर आमजन को भगवान के निकट लाकर खड़ा कर दिया।मानस ऐसा ग्रन्थ है जिसे सभी लोग हर स्थिति मे ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य बना सकता है। कथा श्रवण के महत्व पर आचार्य शान्तनु जी ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान, कथा श्रवण करने का मानवजीवन मे एक विशेष महत्व है।जिस तरह हम अपने मुख से जो भी ग्रहण करते है उसे मल के रूप मे शरीर से बाहर करते है।ठीक इसी प्रकार हम जो कान से ग्रहण करते है उसे मुख से निकालते हैं। हमे इसी विषय को ध्यान में रखने की आवश्यकता है कि हम कान से अपने शरीर मे क्या प्रवेश कराते हैं।हमसबको अपने जीवन मे हमेशा कथा श्रवण करना चाहिए।कथा के माध्यम से जो कान मे प्रवेश करायेवही मुख से निकालकर एक अच्छे भारतीय संस्कारयुक्त संस्कृति की स्थापना मे हमसब योगदान देकर आनेवाली पीढ़ियों को मजबूत करेंगे।

श्री सुमंगलम् कादीपुर के व रामकथा आयोजन समिति के अध्यक्ष, नगरपंचायत अध्यक्ष विजयभान सिंह मुन्ना ने आये हुये अतिथियों का स्वागत अभिनन्दन करते हुये कहा कि हमसभी का यह हमेशा प्रयास रहता है, कि इस तरह के आयोजन आयोजित कर सामाजिक समरसता विश्वबान्धुत्व की एकता और अखण्डता कायम रहे। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रख्यात साहित्यकार डा.सुशील कुमार पांडेय द्वारा लिखित साहित्य तुलसी तत्व चिन्तन, योग तत्व चिन्तन तथा मनीषियों की दृष्टि मे संस्कृत स्वयं डा. साहित्येन्दु जी ने आचार्य शान्तनु जी को भेंट किया।

कार्यक्रम मे श्री सुमंगलम् के संरक्षक अरविन्द जी डा. इन्दुशेखर उपाध्याय, डा. मंगलाप्रसाद श्रीवास्तव, आनन्द द्विवेदी सचिव डा. संजीव पाण्डेय, जयशंकर तिवारी एडवोकेट, विजयशंकर पाण्डेय एडवोकेट, दिवाकर सिंह एडवोकेट, रमेश मोदनवाल, जीतेन्द्र सिंह भदैंया, आचार्य धर्मेंद्र शर्मा, रमेश सिंह, सूर्यलाल सभासद, लालमणि सिंह, अंकित सिंह, अमित जायसवाल, विजय गिरि, ठाकुर प्रसाद मिश्र, डा.राघवेंद्र सिंह, दीपक सिंह सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रिपोर्ट – श्याम चन्द्र श्रीवास्तव

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