रामलीला का हुआ मंचन

0
171

04-Ramleelaजालौन। ग्राम कुंवरपरा में आयोजित रामलीला में लक्ष्मणशक्ति व कालनेम की माया का मंचन किया गया। जिसमें हनुमान-मेघनाद संवाद, लक्ष्मण मेघनाद संवाद के अलावा कालनेम की माया का दृश्य विशेष आकर्षण युक्त रहा।
ग्राम कुंवरपुरा में आयोजित रामलीला के मंचन में लक्ष्मण शक्ति, कालनेम की माया का मंचन किया गया। मंचन के प्रथम दृश्य में श्रीराम द्वारा लंका पर आक्रमण किए जाने की योजना बनाई गई। सभी वानरों ने लंका को चारों ओर से घेर लिया तभी रावण की आज्ञानुसार मेघनाद युद्ध करने के लिए आया। सर्वप्रथम उसकी मुलाकात हनुमान जी से होती है जहां दोनों के बीच जमकर संवाद होता है। बाद में लक्ष्मण के आने के बाद मेघनाद व लक्ष्मण संवाद प्रारंभ हो जाता है। अंत में मेघनाद, लक्ष्मण पर ब्रहमास्त्र का प्रयोग करता है। जिसके फलस्वरूप लक्ष्मण मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते हैं। हनुमान जी उन्हें वहाँ से उठाकर रामदल में ले आते हैं। जहाँ प्रभु राम लक्ष्मणजी की हालत को देखकर बिलख-बिलख कर रो पड़ते हैं। रामजी का विलाप सुनकर दर्शक भी अपने आँसू नहीं रोक सके। इसी बीच जामवंत द्वारा लंका से सुषेन वैद्य को लाने की बात कही जाती है। सुषेन वैद्य संजीवनी बूटी द्वारा ही लक्ष्मणजी के उपचार करने की युक्ति बताने के साथ ही कहते हैं यदि सूर्योदय से पूर्व संजीवनी बूटी नहीं आई तो लक्ष्मणजी के प्राण बचाना असंभव होगा। उसी समय तत्काल हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए चले जाते हैं। रास्ते में कालनेम नामक अपनी तमाम माया फैलाकर राक्षस हनुमान जी का रास्ता रोकने का प्रयास करता है। तब हनुमान जी कालनेम की माया को समाप्त करते हैं। सुषेन वैद्य द्वारा बताए गए पर्वत पर विविध प्रकार की बूटियों में संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाते हैं तो वह पूरा पर्वत लेकर रामदल की ओर चल देते हैं। जहां सुषेन वैद्य संजीवनी बूटी से लक्ष्मण का उपचार करते हैं।
रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव
हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here