रणथम्मौर के बाघ को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

0
316

दिल्ली – आपने इंसानों को आजीवन कारावास और मृत्यु दण्ड की सजा सुनते और भुगतते हुए देखा और सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी किसी जानवर को उम्रकैद की सजा भुगतते हुए देखा और सुना है ? नहीं सुना होगा तो आज हम आपको यहाँ बता रहे रणथम्मौर के उस उस्ताद के बारे में जो भले ही टी-२४ एक टाइगर ही था लेकिन उसके चाहने वालों ने उसकी आज़ादी के लिए भारत की सर्वोच्च न्यायालय तक गुहार लगा डाली I

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टी. एस. ठाकुर की अगुवाई में सुनाई गयी है सजा –
बता दें की रणथम्मौर पार्क की सोभा बढ़ाने वाले टी-२४ उर्फ़ उस्ताद नाम के इस बाघ के ऊपर एक नहीं दो नहीं बल्कि चार इंसानों की हत्या का आरोप लगा है और इसी केस में उसे उम्रकैद की सजा भी सुनाई गयी है I इस टाइगर को सजा हिंदुस्तान की सर्वोच्च न्यायालय ने सुनाई और इतना ही नहीं सर्वोच्च न्यायालय के मुख्यान्यायधीस ने और उनके साथ दो और बड़े जजों की खंडपीठ ने पूरे मुकदमें को बहुत बारीकी से सुनने के बाद निर्णय लिया है I

क्या था पूरा मामला और आखिर क्यों उस्ताद को सुनाई गयी उम्रकैद –
बता दें की रणथम्मौर के इस राजा के ऊपर पिछले साल ४ लोगों की हत्या का आरोप लगा था, जिसके बाद इस शेर को आदमखोर करार दे दिया गया था I बता दें की जैसे ही उस्ताद के ऊपर ४ लोगों की हत्या का इल्जाम लगा राज्य सरकार ने उस्ताद को तुरंत रणथंबौर नेशनल पार्क से निकाल कर सौ किलोमीटर दूर सज्जनगढ़ चिड़ियाघर में डाल दिया, लेकिन उस्ताद के साथ जैसे ही राज्य सरकारने ऐसा किया उस्ताद के चाहने वाले उसकी इस कैद के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए लेकिन हाई कोर्ट ने भी उस्ताद को कैद मे ही रखने को कहा हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा I

सुप्रीम कोर्ट में खुद बैठे चीफ जस्टिस इस मामले की सुनवाई के लिए –
बताते चले की जैसे ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टी. एस. ठाकुर और जस्टिस आर. बानुमाठी, तथा यू यू ललित. की एक बेंच इस मामले की सुनवाई करने के लिए बैठ गयी, इस पूरे मामले में उस्ताद यानि टाइगर टी-२४ की तरफ से दलीलें दे रही थी देश की मशहूर अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह | इंदिरा जय सिंह का तर्क था कि उस्ताद को बस इंसानी लाश के पास खड़े देखा गया है. इंसान को मारते या उसे खाते हुए नहीं. यानी उस्ताद एक आदमखोर है, इसका कोई सबूत या चश्मदीद नहीं है |इस पर अदालत ने हैरानगी जताते हुए पूछा कि क्या इसके लिए आपको चश्मदीद चाहिए? क्या उस्ताद इंसानी लाश के पास खड़ा होकर पहरा दे रहा था? इंदिरा जय सिंह ने दलील दी कि अगर उस्ताद को जंगल की बजाए चिड़ियाघर में कैद रखा गया तो वो बीमार पड़ सकता है | इस पर अदालत ने कहा कि अगर उसे जंगल में आजाद रखा गया तो इससे इंसानी जान को खतरा हो सकता है |

वन्यजीव संरक्षण विभाग की तरफ से भी सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट मांगी थी जिसमें विभाग ने बताया है की उस्ताद के हाव भाव को देखते हुए यह नहीं लग रहा है की उसे यहाँ यानि चिड़ियाघर में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत है, यहाँ पर भी वह एक दम खुश और नार्मल दिखाई पड रहा है I

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here