रेप से जन्में बच्चे का उसके जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार होगा : इलाहबाद हाईकोर्ट

0
227

court

इलाहाबाद हाई कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि दुष्कर्म के कारण जन्मे बच्चे का अपने जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार होता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इससे जुड़े जटिल सामाजिक मुद्दे को सुलझाने के लिए विधायिका उचित कानून बना सकती है।

जस्टिस शबीहुल हसनैन और जस्टिस डीके उपाध्याय की पीठ ने कहा कि दुष्कर्म से जन्मे बच्चे या बच्ची को आरोपी जैविक पिता की नाजायज संतान के तौर पर ही देखा जाएगा। उसका जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार होगा।

कोर्ट ने कहा कि अगर बच्चा या बच्ची को कोई गोद ले लेता है तो फिर उसका जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार खत्म हो जाता है। पीठ ने सरकार को गुजारा भत्ता के तौर पर 10 लाख रुपए 13 वर्षीय रेप पीड़िता को देने का आदेश दिया। साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जब वह बालिग हो जाए तो उसे नौकरी मिले।

पीड़ित लड़की एक गरीब परिवार से है। इस साल के शुरुआत में उससे दुष्कर्म किया गया, जिससे वह गर्भवती हो गई और हाल ही में उसने एक बच्ची को जन्म दिया है। उसके परिवार को काफी समय के बाद बेटी के गर्भवती होने का पता चला, तब तक कानूनी तौर पर गर्भपात कराने की समय सीमा (21 सप्ताह) खत्म हो चुकी थी।

इस पर उसके परिवार ने गर्भपात कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन हाई कोर्ट द्वारा बनाए गए डॉक्टरों के पैनल ने इस स्थिति में गर्भपात कराने की सलाह नहीं दी। उन्होंने कहा कि इससे पीड़िता को जान का खतरा है। इस पर पीड़िता ने कहा था कि उसकी बेटी इस शर्म के साथ समाज में जीवित नहीं रह सकती है इसलिए बेहतर होगा कि वह बच्ची को जन्म दे और उसे कोई गोद ले ले।

कोर्ट ने कहा कि नवजात बच्ची को गोद लेने के लिए दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर बच्ची को कोई गोद लेता है तो फिर उसका अपने जैविक पिता की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं रह जाएगा। लेकिन कोई उस बच्ची को गोद नहीं लेता है तो बिना कोर्ट के निर्देश के ही उसका अपने जैविक पिता की संपत्ति में अधिकार होगा।

Source – PIB

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

19 − eighteen =