बालू के दाम छू रहे आसमान , निर्माण से जुड़े मजदूर भुखमरी के कगार पर

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भदोही (ब्यूरो) योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही लगातार सिर्फ बालू व खनन पर राजनीति चल रही है। सरकार व भाजपा कार्यकर्ता भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की बात कह ताली बजाने में लगे हुए हैं। जून माह में इलाहाबाद व मिर्जापुर जनपद से खनन परमिट जारी होने पर जो बालू आ रहा था, उस गर्दा बालू का दाम 4000 रुपये के ऊपर था उसे देखकर आप नहीं कह सकते थे कि यह परमिट से आ रही है। वो इसलिए क्योंकि पिछले वर्ष 1300 से 1700 रुपये प्रति ट्रैक्टर मिलने वाली बालू का दाम यदि 5000 हो गया तो यह वैध खनन है या कालाबाजारी व भ्रष्टाचार; इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। इसे लेकर बड़ा सवाल लोगों के जहन में कौंध रहा है कि परमिट के बाद इतनी महंगी बालू क्यों मिल रही है।

यदि बालू खनन 30 जून तक ही होना था तो क्यों नहीं जिले के सीतामढ़ी, इब्राहिमपुर, दुगुना सहित अन्य घाटों पर डम्प बालू की नीलामी की कार्यवाही की गई? अब तो दूसरे जनपदों से भी बालू मिलनी बन्द हो गई है। बालू पूर्णतया बाधित होने से न सिर्फ विकास ठप पड़ गया है, अपितु राजगीर मिस्त्री, मल्लाह सहित अन्य मजदूर भूखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। बालू न मिलने से बिल्डिंग मैटेरियल डीलर तथा भट्ठा मालिक भी परेशान हैं। बालू तो लोगों के जी का जंजाल बनी ही थी अब बारिश भी विकास कार्य में रोड़ा बन गई है। यदि प्रशासन चाहता तो घाटों पर डम्प बालू को नीलामी प्रक्रिया पूर्ण कराकर बिक्री करा सकता था परंतु शासन की आंखों पर मानो पट्टी बंधी थी, जो आज तक नहीं खुल सकी है। जिले को 30 दिसम्बर तक शौचमुक्त घोषित करने का लक्ष्य है, इस हेतु लाखों शौचालयों का निर्माण होना है। लेकिन न ही बालू मिल पा रही है और न ही अब तक ग्राम पंचायतों को धन मुहैया कराया गया है। अतः इस वर्ष में ओडीएफ भदोही का सपना अब सिर्फ सपना-सा लगने लगा हैं। पहले बालू और अब बारिश के खलल डालने से लोहिया आवास, इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास, सहित अन्य सरकारी व प्राइवेट निर्माण कार्य ठप पड़ गए हैं।

रिपोर्ट : रामकृष्ण पाण्डेय

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