ग्रामीण इलाकों में बेची जा रही है कच्ची शराब

0
58
प्रतीकत्मक फोटो

बछरावाँ/रायबरेली (ब्यूरो)- पुलिस प्रशासन की उदासीनता के कारण ग्रामीण इलाकों एवं ढाबों पर कच्ची मिलावटी शराब बेची जा रही है जिसके कारण सैेकडों परिवार तबाह हो रहे है इन ढाबों पर हल्का सिपाहियों के अलावा जिम्मेदार अधिकारी कभी निरीक्षण नहीं करते है चेकिंग के दौरान ढाबों पर खडे वाहनों एवं आने जाने वालों का कोई लेखा जोखा नही होता इन ढाबों पर सी0सी0 कैमरे भी नही होते है यही कारण है कि ढाबा मालिक मन माने रेट पर खाने का रेट निर्धारित करते हैं। चैबिस घंटे नौनिहाल बच्चों से काम लिया जाता है जिनका श्रम विभाग में पंजीकरण भी नहीं होता।

ढ़ाबों को पुलिस अपनी वसूली का बेहतर अड्डा समझती है ग्रामीण स्तर के मामले दलालों के माध्यम से ढाबों पर ही निस्तारित किये जाते हैं। मेन चैराहा के पुलिस बूथ पर होमगार्डों द्वारा वसूली जारी है मुख्यमंत्री के निर्देशों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं विभागीय अधिकारी। शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी एवं अवकाश कार्य करने वालों को नही ं मिलता।

आबकारी विभाग के अधिकारियों की निगााहें उक्त ढाबों पर नहीं पडती हैं कन्नावाँ, पीठन, खैरहनी, हरदोई जैसे ग्रामों में महिलायें कच्ची शराब के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं जहाँ उनके बच्चों की शिक्षा पर बुरा प्रभाव पडता है।

उनकी मान्सिकता खराब होती है। कमाई के चक्कर में पुरूषों का नियंत्रण महिलाओं पर कम होता जा रहा है। गाँव की हालत यह है कि किरानों की दुकानों में मुनक्का के नाम से भाँग की गोली बेची जाती है कुछ शौकीन लोग ठन्ढा एवं सोडा वाटर में शराब मिलाकर पी रहे हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने स्वास्थ्य मंत्री से राज्य मार्ग पर स्थित ढाबों पर गोपनीय जाँच कराये जाने की माँग की है जिससे राज्य मार्गों पर आये दिन हुड.दंग रूक सके। दैनिक यात्रीे अपने को सुरक्षित महसूस कर सकें।

रिपोर्ट- राजेश यादव

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY