RBI ने डिफाल्टर फार्मों के खिलाफ बैंकों की ताकत बढ़ाई

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रिज़र्व बैंक ने कर्ज लेकर डिफाल्ट करने वाली फार्मों के खिलाफ बैंकों को नयी तरह की ताकत दी है, इससे बैंकों को यह अधिकार मिलेगा कि अगर कर्ज लेने वाली कंपनी रिस्ट्रक्चरिंग पैकेज में तय शर्तों को पूरा नहीं करती है तो बैंक अपने बकाया कर्ज को मेजॉरिटी इक्विटी स्टेक में बदल लें, सभी डेट रिस्ट्रक्चरिंग डील्स में लोन कन्वर्जन की पूर्व शर्त शामिल रहेगी |

इसमें बैंकों को बताना होगा कि अगर कर्ज लेने वाली कंपनी तय वक्त पर अदायगी नहीं करती है तो बैंकों के पास यह विकल्प होगा कि वे पूरे कर्ज को या उसके कुछ हिस्से को इक्विटी में बदल लें। डेट को इक्विटी में कन्वर्ट करते हुए एसडीआर को लागू करने का निर्णय अकाउंट रिव्यू करने के 30 दिनों के भीतर करना होगा |

 

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फोटो क्रेडिट –  RBI

बैंकिंग सिस्टम डूब सकने वाले लोन की समस्या से परेशान है। इकरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग ऐसेट्स यानी बैड लोन इस फाइनैंशल इयर में बढ़कर कुल कर्ज के 5.9% पर पहुंच सकता है, जो पिछले साल 4.4% पर था।

RBI ने कहा जॉइंट लेंडर्स फोरम को कंपनी के प्रदर्शन पर निगाह रखनी चाहिए और उपयुक्त प्रोफेशनल मैनेजमेंट नियुक्त करना चाहिए। साथ ही, लेंडर्स को कंपनी की इक्विटी होल्डिंग्स नए प्रमोटर्स को जल्द से जल्द डाइवेस्ट करनी चाहिए, नए मैनेजमेंट का पुराने प्रमोटर्स से कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए। नए प्रमोटर को समूचा 51% हिस्सा खरीदना होगा। हालांकि अगर फॉरन इन्वेस्टमेंट 51% से कम पर सीमित हो, तो नए प्रमोटर को पेड-अप कैपिटल का कम से कम 26% या लागू होने वाली विदेशी निवेश सीमा तक लेना चाहिए।

 

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