RBI ने डिफाल्टर फार्मों के खिलाफ बैंकों की ताकत बढ़ाई

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http://molpred.ptzsite.ru/library/kak-stat-finansovim-geniem.html रिज़र्व बैंक ने कर्ज लेकर डिफाल्ट करने वाली फार्मों के खिलाफ बैंकों को नयी तरह की ताकत दी है, इससे बैंकों को यह अधिकार मिलेगा कि अगर कर्ज लेने वाली कंपनी रिस्ट्रक्चरिंग पैकेज में तय शर्तों को पूरा नहीं करती है तो बैंक अपने बकाया कर्ज को मेजॉरिटी इक्विटी स्टेक में बदल लें, सभी डेट रिस्ट्रक्चरिंग डील्स में लोन कन्वर्जन की पूर्व शर्त शामिल रहेगी |

уаз буханка 3909 технические характеристики इसमें बैंकों को बताना होगा कि अगर कर्ज लेने वाली कंपनी तय वक्त पर अदायगी नहीं करती है तो बैंकों के पास यह विकल्प होगा कि वे पूरे कर्ज को या उसके कुछ हिस्से को इक्विटी में बदल लें। डेट को इक्विटी में कन्वर्ट करते हुए एसडीआर को लागू करने का निर्णय अकाउंट रिव्यू करने के 30 दिनों के भीतर करना होगा |

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http://czerwonalampa.pl/owner/detalizatsiya-zvonkov-drugogo-nomera.html детализация звонков другого номера फोटो क्रेडिट –  RBI

как открыть сейф в пейдей 2 बैंकिंग सिस्टम डूब सकने वाले लोन की समस्या से परेशान है। इकरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग ऐसेट्स यानी बैड लोन इस फाइनैंशल इयर में बढ़कर कुल कर्ज के 5.9% पर पहुंच सकता है, जो पिछले साल 4.4% पर था।

http://www.allaboardtv.com/owner/plan-raboti-atk-na-2017-god.html план работы атк на 2017 год RBI ने कहा जॉइंट लेंडर्स फोरम को कंपनी के प्रदर्शन पर निगाह रखनी चाहिए और उपयुक्त प्रोफेशनल मैनेजमेंट नियुक्त करना चाहिए। साथ ही, लेंडर्स को कंपनी की इक्विटी होल्डिंग्स नए प्रमोटर्स को जल्द से जल्द डाइवेस्ट करनी चाहिए, नए मैनेजमेंट का पुराने प्रमोटर्स से कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए। नए प्रमोटर को समूचा 51% हिस्सा खरीदना होगा। हालांकि अगर फॉरन इन्वेस्टमेंट 51% से कम पर सीमित हो, तो नए प्रमोटर को पेड-अप कैपिटल का कम से कम 26% या लागू होने वाली विदेशी निवेश सीमा तक लेना चाहिए।

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