उन्नाव में देखी जा सकती है महिला सशक्तिकरण की हकीकत

0
317

उन्नाव(ब्यूरो)– एक तरफ सरकार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर योजनाओं सहित प्रचार प्रसार पर लाखों रुपये खर्च कर महिलाओं का सम्मान दिलाने का दम भर रही है लेकिन आज भी गाँव व कस्बो की गलियों मे महिलाओं की जिन्दगी कूडे के ढेर पर निर्भर हो गयी है| बुधवार आठ मार्च को पूरे देश मे महिला शसक्तीकरण मनाया जा रहा है लेकिन तहसील हसनगंज क्षेत्र मे गाँव और कस्बो मे महिलाओ पर महिला शसक्तीकरण शब्द श्राप बन कर रह गया है तथा कहीं पत्नी अपने पति से, युवती पड़ोसी से, छात्राएं स्कूली शोहदों से अपने आप को असुरक्षित जान कर सहमी सहमी सी जिंदगी गुजारने पर मजबूर हैं| हसनगंज व्लाक इसका जीता जाता सबूत है|

ब्लाक मुख्यालय पर महिला कूड़ा बीन कर अपने परिवार का निर्वाह कर रही है| भले ही सरकार महिलाओं के लिये गावो मे मनरेगा योजना के अंतर्गत समाजवादी पेंशन योजना में लाभ देकर सम्मान देकर काम करने का कार्य किया है जबकि सरकार इन योजनाओं को आज भी महिलाएं अंजान होकर कूड़े के ढेर पर जिन्दगी निर्वाह करने को मजबूर हैं| ये सरकार की सुविधाओ की पोल खोलती है| आखिर क्यू आज भी महिला सुरक्षित नही? कहने को तो लोग 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे है, क्या वो असल जिंदगी में किसी महिला का सम्मान करते है? ये दिवस सिर्फ कागज पर दिवस बन कर रह गए है और सरकार भी इन दिवसो को कागज पर मनाने में कोई कसर नही छोड़ते है|

वही हसनगंज में स्वामी सेठ की बिल्डिंग के पास जाडा गर्मी और बरसात के मौसमो की बार झेलती हुई 80 वर्षीय महिला जिंदगी गुजारने को मजबूर और तहसील मुख्यालय के अधिकारी उठाई के पास से रोड पर ऐ नजर बचा कर निकलते रहते है ।

रिपोर्ट- राहुल राठौड़
हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY