बागी नेताओं ने निभाई वोटकटवा की भूमिका

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रायबरेली। जिले के विभिन्न विधान सभा क्षेत्रों में बागी नेताओं ने राजनीतिज्ञों के जीत-हार का गणित ही गड़बड़ा दिया। टिकट न मिलने से आक्रोशित इन नेताओं ने पार्टी विरोध में उतर कर वोटकटवा की भूमिका निभाई। जिससे इनकी हार-जीत की गणित पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन संबंधित पार्टी के लिये इन्होंने समस्याओं का पहाड़ अवश्य खड़ा कर दिया।

विधान सभा चुनाव के क्रम में कई पुराने और रसूखदार नेता अलग-अलग पार्टियों से प्रत्याशी की दौड़ में शामिल थे लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी से इन्हे टिकट नहीं मिला। जिसके चलते यह बगावत पर उतर आये जिसके बाद इन्होंने अपने आला कमान के मंसूबों के बल पर पानी फेरने पर कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। यदि हम बात करे वर्तमान विधायकों के टिकट को लेकर तो सपा के बछरावां विधायक रहे रामलाल अकेला अंतिम समय तक पार्टी आला कमान से टिकट की गुहार लगाते रहे लेकिन कांग्रेस से समझौते के चलते पार्टी ने इनका टिकट काट दिया। जिसके बाद इन्होंने उसी विधान सभा से राष्ट्रीय लोकदल से नामांकन कर पार्टी को अपनी ताकत का एहसास कराने का संकल्प ले लिया। क्षेत्र में अच्छी पकड़ होने के चलते ये जीते या हारे इसका कोई मतलब नहीं है। मतलब सिर्फ इतना है कि इन्होंने समझौते के तहत कांग्रेस के प्रत्याशी की खाट जरूर खड़ी कर दी। यही हाल सदर विधान सभा क्षेत्र से भाजपा की प्रत्याशिता की मांग कर रही डा. भारती पाण्डेय का भी रहा। पहले तो उन्होंने प्रत्यशिता को लेकर बड़े-बड़े दावे किये लेकिन जब भाजपा ने उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया तो उन्होंने भी राष्ट्रीय लोकदल से पर्चा दाखिल कर भाजपा प्रत्याशी की टांग खीचने की कवायद शुरू कर दी। यदि सरेनी विधान सभा क्षेत्र की बात की जाये तो भाजपा के दो दर्जन दावेदारो में से वर्तमान में आधा दर्जन दावेदार भाजपा की नैया डूबाने में लगे रहे।
रिपोर्ट राजेश यादव

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