पाकिस्तानी सेना प्रमुख बनने का प्रस्ताव ठुकराकर ब्रिगेडियर मो. उस्मान आजीवन भारत की रक्षा में खड़े रहे

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brigadier mohd usman MVC (P)

‘द लायन ऑफ़ नौशेरा’ ब्रिगेडियर मो. उस्मान भारत में देशभक्ति के जोश का प्रतीक थे, भारत – पाक बटवारे के समय उन्हें पाकिस्तान की ओर से पाकिस्तानी सेना प्रमुख बनने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया और ‘भारतीय सेना’ (जिसे वह अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करते थे) के साथ अपनी सेवाएं जारी रखी, वह उन दस कैडेट में से एक थे जिन्हें 1932 में सैंड्हर्स्ट इंग्लैंड के रॉयल मिलिट्री अकादमी में दाखिला मिला था |

23 साल की उम्र में ब्रिगेडियर उस्मान को बलूच रेजिमेंट का अधिकार सौंपा गया और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान और बर्मा में सैन्य कार्यवाहियों को बड़े करीब से देखा | 1947-48 के युद्ध के दौरान ब्रिगेडियर उस्मान को 50 पैरा ब्रिगेड के ब्रिगेड कमांडर के र्रोप में नियुक्त किया गया |

उन्होंने आगे आकर अपनी सेना का नेत्रित्व किया और जनवरी – फरवरी 1948 में जम्मू के दो अत्यधिक सामरिक स्थानों नौशेरा और झान्नगर पर उग्र हमला करके विरोधियों को खदेड़ भगाया और यहीं पर उन्हें ‘द लायन ऑफ़ नौशेरा’ की उपाधि मिली | 3,जुलाई -1948 को जम्मू और कश्मीर में कार्यवाही के दौरान वो शहीद हो गये | मरणोपरांत  ब्रिगेडियर मो. उस्मान को उनकी वीरता के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया | ब्रिगेडियर मो. उस्मान सहस, देशभक्ति और राष्ट्रवाद के अदितीय प्रतीक थे जो हमेशा सभी भारतियों के दिल में जीवित रहेंगे |

अखंड भारत परिवार ब्रिगेडियर मो. उस्मान के साहस और देशभक्ति को कोटि – कोटि नमन करता हैं |

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