15 प्रतिशत प्रतिपूर्ति योजना के तहत दालों के आयात और घरेलू बाजार में बिक्री के लिए नाफेड, पीईसी, एसटीसी और एमएमटीसी को हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन महासंघ (नाफेड), प्रोजेक्ट एंड इक्विपमेंट कॉर्पोरेशन (पीईसी), स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (एसटीसी) और मेटल्स एंड मिनरल्स ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (एमएमटीसी) को वर्ष 2006-2011 के दौरान दालों के आयात में हुए नुकसान के लिए 113.40 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की बात कही गई है। ये अदायगी योजना के बंद होने के छह माह बाद दालों की ब्रिक्री में हुए नुकसान के अलावा है। ऐसा करने से कीमतों में कमी लाने की दिशा में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को मदद मिलेगी।

उपभोक्ताओं को खुदरा वितरण सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय पीएसयू एमएमटीसी द्वारा 5000 टन अरहड़ दाल और 5000 टन उड़द दाल के आयात का निर्णय लिया गया है। आयातित दाल की पहली खेप 5 सितंबर, 2015 तक मुंबई पहुंच जाएगी।

केंद्रीय सरकार ने जरूरी चीज़ों, खासतौर पर दालों व प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और उनके दामों पर नियंत्रण रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। दालों की स्टॉक सीमा तय करने के लिए राज्यों को अधिकार दिया गया है। काबुली चना, ऑर्गेनिक दालों और दलहन को छोड़कर अन्य सभी दालों के निर्यात पर प्रतिबंध है। इसके अतिरिक्त दालों के आयात पर शुल्क शून्य है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने गैर ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा की अवधि को 15 सितम्बर तक बढ़ाया
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के अन्तर्गत फसल बीमा की अवधि ऋणी किसानों के लिए 30 सितम्बर 2015 तक है किन्तु गैर ऋणी किसानों के लिए यह सीमा 31 जुलाई 2015 तक की होती है। इधर बिहार, महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल, झारखंड, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, एवं गुजरात राज्यों से गैर ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा की अवधि बढ़ाए जाने के लिए आग्रह पत्र प्राप्त हुआ था।

राज्यों में कम वर्षा अथवा विलम्ब से वर्षा के कारण फसल की बुआई में विलम्ब हुआ ऐसी स्थिति में गैर ऋणी किसानों के लिए बीमा कराने की अवधि को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह जी ने 15 सितम्बर 2015 तक का समय बढ़ाया है।

राज्यों को इसकी सूचना आज भेज दी गई है एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जी ने राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि राज्य सरकार इसका गैर ऋणी किसानों के बीच प्रचार प्रसार जोर शोर से कराएं।

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