मानस हमे धर्म सिखाती है- नरहरिदास

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फैजाबाद (ब्यूरो)– ख्यातिलब्ध भरततपस्थली नंदीग्राम भरतकुंड स्थित श्रीरामजानकी मंदिर प्रांगण में गौसंत परमार्थ सेवी बिन्दुगाद्याचार्य स्वामी श्री देवेन्द्रप्रसादाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता एवं संत रामभूषण  दास‘कष्पालु’ जी महाराज के आयोजकत्व में यषस्वी कथाव्यास आचार्य श्री नरहरिदास जी महाराज के श्रीमुख से हो रही श्री रामकथामष्त का पान करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं।
कथा के आखिरी दिवस भक्तों को सीताराम विवाह प्रसंग की कथा सुनाते हुये कथाव्यास पूज्यपाद नरहरिदास जी महाराज कहते हैं कि राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुहन चारों भाईयों का धूमधाम से विवाह सम्पन्न हुआ। तदुपरांत जनक जी ने सभी बारातियों को जेवनार हेतु आमंत्रित किया। ‘पुनि जेवनारि भई बहुँ भांति’ नाना प्रकार के व्यंजनों का जेवनार हुआ। विवाह उपरांत कोहबर में प्रवेश करने हेतु चारों भाईयों को किशोरी जी की सखियां जानकी जी की चरण पादुका को कुलदेवता बताकर प्रणाम करने को कहती हैं, लक्ष्मण, शत्रुहन व राम प्रणाम नहीं करते लेकिन भरत जी साष्टांग दंडवत करते हैं।
व्यास जी कहते हैं कि भरती जी राम और सीता जी को अलग नहीं समझते इसलिए किशोरी जी की चरणपादुका को प्रणाम करते हैं। व्यास जी कहते हैं मानस की कथा हमें र्धम सिखाती है, मानस एक आचार संहिता है जिसमें धर्म का सार सन्निहत है। मानस मार्तण्ड म.श्री महादेव दास शास्त्री जी महाराज ने भी भक्तों को कथा रस का पान कराया।
कथा के आयोजक संत रामभूषण दास‘कष्पालु’ जी महाराज ने बताया आज 21 फरवरी को वष्हद भंडारे के साथ कथा की पूर्णाहुति होगी। इस अवसर पर कथा के यजमान कपिलदेव दूबे, प.विष्णुप्रसाद नायक शास्त्री, प.विष्णुदेवाचार्य, पुजारी राजेन्द्र दास जी,नंदकुमार मिश्र पेड़ा महाराज , प्रधान रामकष्ष्ण पाण्डेय, रामप्रवेष पाण्डेय, रामकुमार पाण्डेय, रमाकांत दूबे, विनय पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में कथा श्रोता भक्त उपस्थित रहे।

रिपोर्ट-वासुदेव यादव
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