रोजे का उद्देश्य है तकवा हासिल करना

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रायबरेली(ब्यूरो)- रोजा महज खाना-पीना छोड़ने का नाम नहीं, रोजा है स्वयं के मूल्यांकन का रोजा हमें सीख देता है। हमने बुराइयों से बचने और नेक कार्यों में आगे बढ़ने की कितनी कोशिश की परन्तु घमंड, जुल्म, बेईमानी, हेरा फेरी, धोखा लालच और लड़ाई-झगड़ा आदि से हमने किस हद तक मोच्छ प्राप्त किया। रमजान मुबारक रोजा के द्वारा सिर्फ बुराइयों से बचने का नाम नहीं यह नेकियों का मौसमे बहार है। रोजे का उद्देश्य तकवा हासिल करना है। तकवा एहसास का नाम है जिसमें नेकी और अच्छे काम की ओर आगे बढ़ाया जाए और बुराई से बचा जाए। इस्लाम ने बंदों पर रोजा फर्ज करके यह पैगाम दिया है कि वह भूख और प्यास से तड़पने वालों के दर्द का भी एहसास कर सके।

यह उद्गार सलोन क्षेत्र में मौलाना सलमान नदवी रायनी ने तरावीह में खत्म कुरान के अवसर पर बोलते हुए मस्जिद उस्मान खां मे कही। आगे उन्होंने फरमाया कि कुरान समस्त मानव जाति के लिए अवतरित हुआ है हम इसका अध्ययन करें। खुद पढ़ने के साथ-साथ अपने बच्चों में कुरान की शिक्षा का प्रचार प्रसार कर नेक इंसान बनने में उनकी मदद करें। ईद की खुशी में गरीब यतीम मिस्कीन बेसहारा को भी मदद करके शामिल करें।जकात पाबंदी से अदा करें अफ्तार पार्टियों में दबे कुचले गरीब मोहताज को भी शामिल करें। रमजान वह महीना है जिसका पहला अशरह रहमत दूसरा अशरह मगफिरत और अंतिम अशरह जहन्नम से आजादी का है।हमें चाहिए कि हम हजरत मोहम्मद(सल0) के आदर्शों पर चलते हुए अपने देश में आपसी सौहार्द कायम रखें और बच्चों में शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार कर के बच्चों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाए।इस अवसर पर अशरफ मेवाती, नसीम खान, अली अहमद आढ़ती, निजामुद्दीन अंसारी ,हाजी अय्यूब खां,मोहम्मद इस्माईल खां आदि मौजूद रहे।

रिपोर्ट- राजेश यादव 

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